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कौन हैं Rajveer Sir, जिन्हें राजस्थान में करते हैं Khan Sir से ज्यादा पसंद, क्यों आ रहे वीडियो पर लाखों व्यूज?

Rajveer Sir: राजस्थान की तपती रेतीली धरती ने देश को कई शूरवीर दिए हैं, लेकिन आज के दौर में चूरू का एक युवा शिक्षक इतिहास की परिभाषा बदल रहा है। हम बात कर रहे हैं राजवीर सिंह चलकोई (Rajveer Singh Chalkoi) की, जिन्हें छात्र प्यार से 'राजवीर सर' कहते हैं।

अपनी ठेठ मारवाड़ी मिजाज और किस्‍सागोई के अंदाज से उन्होंने शिक्षा जगत में वो मुकाम हासिल किया है, जिसकी तुलना अक्सर देश के दिग्गज शिक्षकों से की जाती है। इतिहास जैसे विषय को, जिसे अक्सर उबाऊ माना जाता है, राजवीर सर ने अपनी अनूठी शैली से एक रोमांचक कहानी बना दिया है। यही कारण है कि आज डिजिटल दुनिया में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और वे राजस्थान के सबसे चहेते मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं।

Rajveer Sir

चूरू से 'स्प्रिंगबोर्ड' तक का प्रेरणादायक सफर

राजवीर सर का जन्म राजस्थान के चूरू जिले में हुआ और उनका गहरा नाता बीकानेर से भी रहा है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और परवरिश राजस्थानी संस्कृति के बीच हुई, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व में साफ झलकता है। अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर (MA) की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं।

हालांकि, एक सुरक्षित सरकारी नौकरी चुनने के बजाय, उन्होंने ज्ञान बांटने का कठिन रास्ता चुना। उन्होंने जयपुर स्थित प्रतिष्ठित स्प्रिंगबोर्ड एकेडमी (Springboard Academy) के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया और देखते ही देखते हजारों प्रशासनिक अधिकारियों (RAS/IAS) के मेंटर बन गए।

पढ़ाने का अनूठा अंदाज, जब इतिहास बन जाता है फिल्म

राजवीर सर की सबसे बड़ी ताकत उनकी मारवाड़ी भाषा और संवाद करने का तरीका है। वह किताबी भाषा के बजाय स्थानीय उदाहरणों और किस्सों का सहारा लेते हैं।

  • कहानी के रूप में इतिहास: वे युद्ध की तारीखों को रटाते नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान का सजीव चित्रण करते हैं।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: पढ़ाते समय मारवाड़ी मुहावरों का प्रयोग छात्रों को बोरियत से बचाता है और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ता है।
  • सोशल मीडिया सेंसेशन: उनके पढ़ाने के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर खूब वायरल होते हैं, जिन्हें सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम लोग भी चाव से देखते हैं। कई लोग उन्हें राजस्थान का 'खान सर' भी कहते हैं।

राजस्थानी भाषा और पहचान के ध्वजवाहक

शिक्षा के साथ-साथ राजवीर सर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने और युवाओं में अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व जगाने के मिशन पर भी काम कर रहे हैं। उनके यूट्यूब चैनल "SPRINGBOARD ACADEMY ONLINE" पर वे न केवल इतिहास पढ़ाते हैं, बल्कि राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति और परंपराओं का प्रचार-प्रसार भी करते हैं। उनका मानना है कि जब तक युवा अपनी भाषा और संस्कृति का सम्मान नहीं करेगा, तब तक वह अपने इतिहास को सही मायनों में नहीं समझ पाएगा।

'द रणवीर शो' (TRS) पर इतिहास की अनसुनी दास्तां

हाल ही में राजवीर सर की लोकप्रियता को तब नई ऊंचाई मिली जब वे भारत के सबसे बड़े पॉडकास्ट "The Ranveer Show" (TRS Hindi) के 469वें एपिसोड में नजर आए। इस बातचीत में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर बेबाकी से चर्चा की।

पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं के जीवन के वो पहलू साझा किए जो पाठ्यपुस्तकों में कम मिलते हैं। हल्दीघाटी, तराइन और देवेर की लड़ाइयों की रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। महिलाओं के बलिदान और राजपूतों की युद्ध नीति पर बात की। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि कैसे फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों को अक्सर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है।

शिक्षा और व्यक्तिगत जीवन

राजवीर सर वर्तमान में पीएचडी (PhD) कर रहे हैं। वे शादीशुदा हैं, हालांकि वे अपने परिवार और निजी जीवन को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं। उनके लिए उनका काम ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। आज वे न केवल एक शिक्षक हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी भाषा और संस्कृति को साथ लेकर सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं।

With AI Inputs

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