राजीव गांधी के हत्यारों को सुप्रीम कोर्ट ने मौत की जगह दी जिंदगी

फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने का पक्ष लेते हुए वकीलों ने कहा था कि दया याचिका के निबटारे मामले में काफी विलंब हुआ जिसके कारण आरोपियों को अत्यधिक मानसिक वेदना का सामना करना पड़ा अत: उनकी सजा को उम्र कैद में बदल दिया जाना चाहिए। वहीं आरोपियों का भी कहना था कि केंद्र ने उनकी दया याचिका को काफी समय तक लंबित रखा जबकि अन्य याचिकाओं की सुनवाई हो गयी थी।
वहीं केंद्र ने आरोपियों की दया याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि याचिका पर फैसला लेने में देरी जरूर हुई पर इसका कारण अस्पष्ट नहीं है। अत: तीनों दोषियों सांतन, मुरूगन और पेरारिवलन की फांसी की सजा बरकरार रखी जानी चाहिए।
यह मई 2012 की बात है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट से लंबित याचिकाएं उनके पास भेजने और सुनवाई करने का फैसला लिया था।












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