'सत्य ही मेरा भगवान', रजत शर्मा या रागिनी नायक किसके पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला? गाली दी या नहीं? हुआ खुलासा

Rajat Sharma Ragini Nayak: इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक वाले 'गाली विवाद' पर अब दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आ गया है। कांग्रेस नेता रागिनी नायक, पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि, रजत शर्मा ने 4 जून को लाइव टीवी डिबेट में रागिनी नायक को अपशब्द कहे थे।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने रजत शर्मा की याचिका पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार रजत शर्मा के खिलाफ कांग्रेस नेताओं के ट्वीट हटाने का आदेश दिया है।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं रागिनी नायक, जयराम रमेश और पवन खेड़ा द्वारा किए गए ट्वीट को जल्द से जल्द हटाने का आदेश दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि रजत शर्मा ने लोकसभा चुनाव परिणाम वाले दिन 4 जून को एक शो दौरान अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।

यह विवाद तब पैदा हुआ जब कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने रजत शर्मा पर 2024 के लोकसभा चुनावों की मतगणना के दिन टेलीविजन पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया।

हाई कोर्ट के फैसले पर रजत शर्मा ने कहा- 'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं'

रजत शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।'' अपने एक अन्य ट्वीट में रजत शर्मा ने कहा, ''मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य ही मेरा भगवान है। अहिंसा उसे साकार करने का साधन है। महात्मा गांधी।''

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- रजत शर्मा का एडिटेड वीडियो पोस्ट किया गया

रजत शर्मा के मानहानि के मुकदमे में उनके पक्ष में एकतरफा अंतरिम फैसला देते हुए न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा, ''यह निर्देश दिया जाता है कि जिन एक्स पोस्ट/ट्वीट को हटाया नहीं गया है, उन्हें दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रतिवादियों द्वारा सात दिनों के भीतर हटा दिया जाए।''

अदालत ने आगे निर्देश दिया कि जो वीडियो सार्वजनिक डोमेन में हैं, उन्हें Google India Private Limited द्वारा निजी बनाया जाना चाहिए और न्यायिक आदेशों के बिना उन्हें सार्वजनिक डोमेन में नहीं डाला जाना चाहिए।

बता दें कि कोर्ट ने जिन यूआरएल को हटाने का आदेश दिया है, वे तीन कांग्रेस नेताओं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाए गए यूट्यूब वीडियो और ट्विटर पोस्ट हैं।

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न्यायमूर्ति कृष्णा ने कहा कि तीनों कांग्रेस नेताओं ने एक्स पर एक एडिटेड वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें दावा किया गया है कि यह इंडिया टीवी न्यू चैनल पर मतदान के दिन आयोजित बहस का 'रॉ फुटेज' है। लेकिन ये हमारी जांच में एडिटेड है।

हालांकि अदालत ने कहा कि अदालत में चलाए गए टीवी बहस के फुटेज से यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि रजत शर्मा ने कुछ सेकंड के लिए ही हस्तक्षेप किया है लेकिन रागिनी नायक के खिलाफ कोई अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

अदालत ने कहा कि मानहानि और सार्वजनिक आलोचना के बीच एक पतली रेखा है और प्रतिस्पर्धी दावों और अधिकारों के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखना अदालतों के लिए एक कठिन कार्य है।

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सोशल मीडिया पर क्या बोल रहे हैं लोग? देखें कुछ ट्वीट?

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