राजस्थान : अब स्कूलों में पढ़ाया जाएगा हल्दीघाटी का नया इतिहास

जयपुर। एक बार फिर से विरोधियों के निशाने पर राजस्थान की बीजेपी सरकार है, इस बार सरकार पर इतिहास से छेड़-छाड़ का आरोप लगा है। दरअसल राजस्थान बोर्ड में पढ़ाई जा रही कुछ नई इतिहास की किताबों में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है, जिसके कारण बवाल मचा है। नई किताबों में मुगल शासकों को सामूहिक हत्यारा और हिंदू शासकों को कई लड़ाइयों में जीता हुआ बताया गया है।

चाचा नेहरू और महात्मा गांधी का जिक्र नहीं

चाचा नेहरू और महात्मा गांधी का जिक्र नहीं

नई किताबों में चाचा नेहरू और महात्मा गांधी का जिक्र नहीं है। यहां तक कि वीर पुरूष महाराणा प्रताप के इतिहास को भी बदल दिया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए तैयार की गई सोशल साइंस की नई किताब में लिखा गया है कि महाराणा प्रताप ने अकबर को 1576 में हल्दीघाटी की लड़ाई में हराया था।

महाराणा प्रताप महान थे ना कि अकबर?

महाराणा प्रताप महान थे ना कि अकबर?

अब तक के इतिहास में इस युद्ध को बेनतीजा बताया जाता रहा है अर्थात यह बताया जाता रहा है कि ना तो महाराणा प्रताप की सेना जीती थी और ना ही अकबर जीते थे। लेकिन राजस्थान के शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने विभाग की कमान संभालते ही महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी का विजेता बता दिया गया है।

हल्दीघाटी की लड़ाई

हल्दीघाटी की लड़ाई

वैसे भी हल्दीघाटी की लड़ाई को लेकर इतिहासकारों की अलग-अलग राय है लेकिन इस तरह से कभी भी तथ्यों को बदलने की बात सामने नहीं आई थी। नए अध्याय के मुताबिक महाराणा प्रताप अपनी मातृभूमि मेवाड़ की रक्षा के लिए ताकत से लड़े थे और उनकी सेना ने अकबर की सेना को हराकर दम लिया था, इससे पहले पाठ्यक्रम से 'अकबर महान है' पाठ को हटाने की बात सामने आई थी।

शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी का तर्क

शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी का तर्क

शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने इस बारे में अपने रूख को साफ स्पष्ट करते हुए कहा कि अब तक इतिहास सही ढंग से नहीं पढ़ाया जा रहा था, अब इसे सही किया जा रहा है। देवनानी का तर्क है कि यदि अकबर हल्दीघाटी का युद्ध जीतता तो फिर वो छह बार मेवाड़ पर हमले क्यों करता?

इतिहास के दो सेक्शनों के नाम में बदलाव

इतिहास के दो सेक्शनों के नाम में बदलाव

मालूम हो कि केवल स्कूल ही नहीं राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने भी इतिहास के दो सेक्शनों के नाम में बदलाव किए हैं। विभाग ने 'प्राचीन इतिहास' (600 BC- 1200AD) का नाम बदलकर 'गोल्डन एरा ऑफ इंडिया' नाम दिया है वहीं 'मध्यकालीन इतिहास' (1200 AD- 1700AD) के नाम को बदलकर 'स्ट्रग्लिंग इंडिया' कर दिया है।

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