'समलैंगिक विवाह के विरोध में राजस्थान, 6 राज्यों ने और समय मांगा', सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार
समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज भी जारी है। 9 दिन की सुनवाई के बाद भी दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं।

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिका पर बुधवार को 9वें दिन भी सुनवाई जारी है। मामले पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएम नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली की संवैधानिक बेंच दलीलें सुन रही है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को अहम जानकारी दी। केंद्र सरकार ने कहा कि राजस्थान समलैंगिक विवाह का विरोध कर रहा है। वहीं छह राज्य को अभी और समय चाहिए ताकि लोगों की राय को सही तरीके से जाना जा सके।
इन 6 राज्यों ने मांगा और समय
सुप्रीम कोर्ट में केद्र सरकार ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मणिपुर, असम और सिक्किम ने कहा कि उन्हें इसकी जांच के लिए और समय की आवश्यकता होगी। इन राज्यों ने कहा कि समलैंगिक विवाह पर लोगों की राय लेने के लिए और समय चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार पहले से ही समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का विरोध करते आई है।
बता दें कि केंद्र ने 19 अप्रैल को अदालत को सूचित किया था कि उसने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सूचित किया है कि समलैंगिक विवाह मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय कर रहा है। राज्यों को सूचित करने का कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 अप्रैल को पहले ही स्पष्ट कर दिए जाने के बावजूद है कि वह विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों के दायरे में नहीं आएगा। अदालत ने खुद को इस बात की जांच करने के लिए प्रतिबंधित करने का फैसला किया था कि क्या समलैंगिक विवाहों को समायोजित करने के लिए विशेष विवाह अधिनियम के दायरे को विस्तृत किया जा सकता है।












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