कोई होगा एक्शन शहीदों का अपमान करने वालों पर
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीदों का अपमान करने में छत्तीसगढ़ सरकार ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जवानों के वस्त्र और उनके सामानों को अस्पताल के कचड़े के साथ फेंक दिया गया वह केवल अमानवीयता एवं असंवेदनशीलता नहीं, क्रूरता है, उनकी शहादत का अपमान है।

हिला देने वाला मंजर
वरिष्ठ लेखक और चिंतक अवधेश कुमार कहते हैं कि यह दृश्य किसी को अंदर से हिला देता है। एक तो नव माओवादियों के जाल में फंसकर इन सुरक्षा बलों ने अपनी बलि चढ़ाई। पूरे देश में उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव पैदा हुआ एवं माओवादियों के प्रति गुस्सा। साथ ही मुख्यमंत्री रमण सिंह सरकार के प्रति खीझ में भी इजाफा हुआ।
क्रूर आचरण
पर जिस तरह से हमारे जवानों के वस्त्र और उनके सामानों को अस्पताल के कचड़े के साथ फेंक दिया गया वह केवल अमानवीयता एवं असंवेदनशीलता नहीं, क्रूरता है। उनकी शहादत का अपमान है। यह सामान्य समझ की बात है और नियम भी कि मृतक के एक एक चीज को उनके परिवार जनों को सौंपा जाए। वे चाहे उन्हें रखें न रखें।
इसमें कोई शक नहीं है कि सामान्यतः परिवार के लिए वो स्मृतियां होतीं हैं जिन्हें संजोकर उनके परिजन रखते हैं या अंतिम क्रिया के दौरान उन्हें श्मशान घाट पर छोड़ देते हैं जो श्मशान के परंपरागत मालिक ले जाते हैं। आखिर रायपुर के अस्पताल प्रशासन ने इतनी बड़ी घटना, जिस पर पूरा देश उद्वेलित एवं दुखी है, को इस गलीज तरीके से कैसे हैण्डल किया यह भी विचार करने की बात है।
अवधेश कुमार कहते हैं कि वे इसके लिए अस्पताल के स्टाफ को दोष न देकर उन अधिकारीयों को दोष देते, जिनकी जिम्मेवारी होती है कि अपने शहीद जवानों के शरीर (युद्धरत) पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों तक पहुंचाएं । इसका मतलब उन्होंने अपने शहीद जवानों के देखरेख के लिए कोई परिचारक (उस समय यूनिट के जवान ही इसकी भूमिका निभाते हैं ) नहीं लगाया ।
रायपुर के पत्रकार राजेश शर्मा ने बताया कि शहीदों के साथ हुए अपमान से सारा छत्तीसगढ़ अपने को शर्मसार महसूस कर रहा है। उन्होंने भी दोषियों कठोर दंड देने की मांग की।












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