1984 दंगों पर राहुल गांधी के शब्द नरेंद्र मोदी के लिए लाभदायक

Rahul Gandhi
नई दिल्ली। राहुल गांधी ने भले ही अपने आप को और कांग्रेस सरकार को 1984 के एंटी-सिख रायट केस में दोषमुक्त कर लिया हो, पर उनके टीवी इंटरव्यू के दौरान उनके शब्द आगामी लोकसभाा चुनाव में नरेंद्र मोदी को फायदा पहुंचाने वाले हैं।

कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने टाइम्स नाउ चैनल पर दिए गए एक साक्षात्कार में कहा, "84 के रायट और गुजरात के दंगों में यह अंतर था कि सरकार ने 1984 में हुए दंगों को रोकने की कोशिश की थी। मैं उस समय बच्चा था, मुझे याद है कि सरकार ने उस समय दंगों को रोकने का भरसक प्रयास किया था। गुजरात में स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। गुजरात सरकार असल में दंगों को उकसा रहा था और उसे बढ़ावा दे रहा था। इसलिए इन दो परिस्थितियों में ज़मीन आसमान का अंतर है, यह कहना कि निर्दोष लोगों की जान जाना बिल्कुल गलत है।"

उन्होंने पहले कहा था कि हो सकता है 1984 के दंगों में कांग्रेस नेता भी सम्मिलित रहे होंगे। इस साक्षात्कार के बाद कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के इस वक्तव्य के लिए कि कुछ कांग्रेस नेता दंगों में शामिल थे का बचाव करने के लिए मजबूर हो गयी है। सीएनएन-आईबीएन के एक पैनल डिस्कशन में भाग लेने वाले लोगों ने राहुल गांधी की टिपण्णी और पार्टी के निर्णय की कटु आलोचना की और कहा कि दंगों के समय पुलिस पूरे तरीके से निष्क्रिय थी और इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि सरकार की दंगों में सहभागिता थी।

अभी तक किसी एसआईटी की नियुक्ति क्यूँ नहीं हुई है?

सीएनएन-आईबीएन के राजनितिक एडिटर संजय सूरी ने जिन्होंने दंगों को कवर किया था बताया, "पुलिस मौक़ा-ए-वारदात से गायब थी। पुलिस तो सिर्फ मूकदर्शक बनी रही और कोई कार्रवाई नहीं की।"

सुल्तानपुरी में जहाँ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दंगों को भड़काने का दोषी माना जाता है, सूरी कहते हैं कि पुलिस यहाँ बिलकुल निष्क्रिय थी। उन्होंने यह भी कहा कि इन दंगों के बारे में जांच करने के लिए मिश्रा कमीशन का गठन हुआ जो एक बहुत बड़ा मज़ाक था। मैं मुख्य गवाह की तरह था पर मेरी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त न्यायिक सूचना के अनुसार कई लोगों को गिरफ्तार किया गया पर इसका इस्तमाल पीड़ितों के बयान के मद्देनज़र कार्य करने में नहीं किया गया। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर, वेद मारवाह जो उस समय पद पर पदस्थ थे कहते हैं कि उन्हें अच्छी तरह से जांच करने से रोका गया।

सीनियर अधिवक्ता हरविंदर सिंह फूलका जो पीड़ितों के लिए केस लड़ते रहे हैं कहते हैं कि मोदी को 2002 के दंगों के लिए दोषी ठहराने का कोई कारण नहीं हो सकता। उन दोषियों पर कड़ी कार्यवाही नहीं की गई जो तीन दशक पहले हुए दंगों में दोषी पाये गए थे। "कांग्रेस पार्टी दोषियों को बचाने की कोशिश क्यूँ कर रही है? अभी तक किसी एसआईटी की नियुक्ति क्यूँ नहीं हुई है? इसकी नियुक्ति कोर्ट के द्वारा क्यूँ हो? सरकार नियुक्ति क्यूँ नहीं कर सकती?" फूलका ने पूछा।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि वर्तमान मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल को राज्य के लेफ्टिनेंट गवर्नर पर यह दबाव डालना चाहिए कि वह एक विशिष्ट जांच दल को नियुक्त करें जो दंगों के बारे में सही जांच कर सके। बीजेपी के प्रधान मंत्री के उम्मीदवार को कांग्रेस ने 2002 के दंगों के लिए दोषी ठहराया है, पर क्या कांग्रेस अपने आप को दोगलेपन से दोषमुक्त कर पायेगी?

इन सब बातों से यह साफ है कि सिख समुदाय कांग्रेस से पहले भी खफा था और राहुल के भाषण के बाद और ज्यादा खफा हो गया। यह गुस्सा लोकसभा चुनाव के दौरान वोट में परिवर्तित जरूर होगा।

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