पंजाब कांग्रेस में बेचैनी बढ़ाकर विदेश चले गए राहुल गांधी, पार्टी के अंदर उठ रहे हैं कई सवाल
नई दिल्ली, 31 दिसंबर: राहुल गांधी के अचानक विदेश चले जाने से पंजाब कांग्रेस नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें लग रहा था कि 3 जनवरी को मोगा से प्रस्तावित रैली से पार्टी को एकजुट होने का मौका मिलेगा, लेकिन वह अब हैरान हैं कि पार्टी नेता के विदेश जाने की भनक भी उन्हें विपक्ष के जरिए मिली। लोग सामने से नहीं बोल रहे हैं, लेकिन उनको लेकर सवाल पंजाब के नेताओं के बीच भी उठ रहे हैं। क्योंकि, प्रदेश में पार्टी खेमेबाजी से परेशान है और उनके विदेश चले जाने की वजह से पहली औपचारिक चुनावी रैली भी स्थगित करनी पड़ गई है। उधर नवजोत सिंह सिद्धू कब क्या करेंगे या कब क्या बोल देंगे, उसे समझना पार्टी नेताओं के वश से बाहर है?

राहुल गए विदेश, मोगा की रैली करनी पड़ी कैंसिल
कांग्रेस ने 3 जनवरी को मोगा में रैली कराकर पंजाब विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत करने की घोषणा कर रखी थी। लेकिन, जब प्रदेश यूनिट को विपक्ष से भनक लगी की पार्टी नेता राहुल गांधी निजी यात्रा पर विदेश चले गए हैं तो पार्टी को यह रैली रद्द करनी पड़ गई। क्योंकि, इस रैली में वो खुद पहुंचने वाले थे। सूत्रों का कहना है कि वे नानी के साथ नया साल मनाने के लिए इटली गए हैं। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उनकी इस विदेश यात्रा की पुष्टि सिर्फ इतना कहकर की है कि 'राहुल गांधी एक छोटी से निजी यात्रा पर हैं। बीजेपी और इसके मीडिया के मित्रों को बेवजह की अफवाह नहीं फैलानी चाहिए।' पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल इस साल नवंबर में भी करीब तीन हफ्ते किसी अज्ञात विदेशी स्थान पर बिताकर आए थे। अब माना जा रहा है कि जब वे विदेश से लौटेंगे तो पंजाब में 15 जनवरी को और गोवा में 16 जनवरी को रैलियों को संबोधित करेंगे।
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पंजाब कांग्रेस में बेचैनी बढ़ा गए राहुल गांधी
लेकिन, राहुल की यह 'बेहद' निजी विदेश यात्रा ने पंजाब कांग्रेस में बेचैनी बहुत बढ़ा दी है। पार्टी वहां कई खेमों में बंटी हुई है। पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि उम्मीद थी कि मोगा की रैली में उनकी मौजूदगी से पार्टी को एकजुटता दिखाने का मौका मिलेगा। पार्टी के लोगों के मुताबिक रैली के लिए तैयारियां भी शुरू कर ली थीं और वेन्यू भी तय कर लिया गया था। एक नेता के मुताबिक, 'हमें तो पता भी नहीं था कि वह विदेश चले गए हैं। जब विपक्ष ने इसे उठाया और सुरजेवाला ने उनकी यात्रा का बचाव किया, तभी जाकर हमें जानकारी मिली।' उन्होंने कहा, 'अब रैली स्थगित हो चुकी है। हमें उम्मीद थी कि राहुल मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और दूसरे नेताओं को एक मंच पर लाने में सफल होंगे, जिससे कि पार्टी के हित को नुकसान पहुंच रहा है। उनकी (राहुल की) गैर-मौजूदगी से टिकट वितरण प्रक्रिया में भी देरी होगी। '

मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा चाहते हैं सिद्धू
सिद्धू चाहते हैं कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा हो जाए, क्योंकि वह चुनावों में सिर्फ शोपीस नहीं बनना चाहते। लेकिन, पार्टी के कुछ नेता उनकी इस बात पर भी नजर रख रहे हैं। एक नेता ने कहा है, 'हमें नहीं पता कि क्या वे भी किसी दूसरी पार्टी की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन, वह एक बात साफ कर रहे हैं कि वह पार्टी के लिए तबतक प्रचार नहीं करेंगे, जबतक कि उन्हें सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं कर दिया जाता।' सिद्धू को लेकर कुछ और नेता भी आशंकित हैं। मसलन गुरुवार को कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने उनको लेकर कहा है, 'मैं उन्हें मुझको पार्टी टिकट देने से इनकार करने की चुनौती देता हूं। मैं निर्दलीय जीतकर आऊंगा।' उनका कहना है कि वह हैरान हैं कि पार्टी में अभी इस बात को लेकर संघर्ष नहीं हो रहा है कि कांग्रेस सत्ता में कैसे लौटे, बल्कि यह हो रहा है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।

'अमरिंदर की आलोचना करते थे...तो राहुल क्या कर रहे हैं ?'
पार्टी के एक और नेता ने साफ कहा कि, 'हम सिर्फ यह उम्मीद कर रहे थे की पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दखल देगा और सिद्धू को कंट्रोल करेगा। लेकिन, लगता है कि सबको छोड़ दिया गया है। हम पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को छुट्टियां मनाने और नहीं मिल पाने के लिए आलोचना किया करते थे, लेकिन अब राहुल क्या कर रहे हैं ?' पंजाब में कांग्रेस के सामने सिर्फ आंतरिक खींचतान नहीं है। बीजेपी लगातार उसके नेताओं को अपने में शामिल करती जा रही है। पार्टी के तीन एमएलए अभी-अभी भाजपा का कमल पकड़ चुके हैं। गुरुवार को वरिष्ठ नेता सुखजिंदर राज सिंह ने भी PUNGRAIN के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है और आरोप लगाया है कि चन्नी सरकार बरगारी बेअदबी मामले में न्याय नहीं दिला पा रही है। उनके भाजपा या आम आदमी पार्टी में जाने की अटकलें हैं। उधर लुधियाना के पार्टी नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री भरत भूषण आशु ने भी बिना कांग्रेस के निशान और बिना पार्टी नेताओं की तस्वीर वाला अपना बिलबोर्ड लगवा लिया है।












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