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Rahul Gandhi की ‘मृत लोगों’ संग चाय पर चर्चा, बोले- ग्रेट अनुभव! EC पर तंज या पब्लिसिटी स्टंट?- VIDEO

Rahul Gandhi Chai Par Charcha: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वे बिहार में उन लोगों के साथ चाय पीते नजर आ रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर मतदाता सूची में 'मृत' घोषित किया गया है।

इस वीडियो के जरिए राहुल ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र के खिलाफ 'आपराधिक साजिश' करार दिया।

Rahul Gandhi Tea Party With Dead Voters

'मृत लोगों' के साथ चाय: राहुल का तंज

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर यह वीडियो पोस्ट करते हुए तंज कसा, 'मेरे जीवन में कई अनोखे अनुभव हुए हैं, लेकिन 'मृत लोगों' के साथ चाय पीने का मौका पहली बार मिला। इस अनूठे अनुभव के लिए मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं!'

वीडियो में राहुल उन लोगों से बातचीत करते दिख रहे हैं, जो दावा करते हैं कि वे जीवित होने के बावजूद मतदाता सूची में मृत घोषित किए गए हैं। राहुल पूछते हैं, 'मैंने सुना है कि आप लोग जीवित नहीं हैं। चुनाव आयोग ने आपको मृत घोषित कर दिया है। आपको यह कैसे पता चला?' एक व्यक्ति जवाब देता है कि उन्हें यह जानकारी मतदाता सूची की जांच के बाद मिली।

50 से ज्यादा मामले एक पंचायत में

वीडियो में एक व्यक्ति ने बताया कि केवल एक पंचायत में कम से कम 50 लोग ऐसे हैं, जिन्हें जीवित होने के बावजूद मतदाता सूची में मृत दिखाया गया है। उनका दावा है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव के निर्वाचन क्षेत्र में भी ऐसी अनियमितताएं सामने आई हैं।

इन लोगों ने कहा कि उनके पास इस हेरफेर के लिखित सबूत हैं और कुछ ने अपने मताधिकार की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में छह घंटे तक इंतजार भी किया। राहुल और उनके समूह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इन मामलों पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

'Vote Chori' का पुराना आरोप

यह वीडियो उस समय सामने आया है, जब राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। 7 अगस्त को राहुल ने दावा किया था कि कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा खंड में 1,00,250 फर्जी वोटों की गणना हुई, जिसने भाजपा को जीत दिलाने में मदद की। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र के खिलाफ अपराध' करार दिया और कहा कि उनके पास इस हेरफेर के पुख्ता सबूत हैं।

राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कांग्रेस ने छह महीने की जांच के बाद महादेवपुरा में 11,965 डुप्लिकेट वोट, 40,009 फर्जी पते, 10,452 बल्क वोटर, 4,132 अवैध फोटो वाले वोटर और 33,692 नए वोटरों के फॉर्म 6 के दुरुपयोग के सबूत पाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसी अनियमितताएं हुई हैं।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने राहुल के इन आरोपों को 'बेबुनियाद' और 'भ्रामक' बताते हुए खारिज किया है। आयोग ने कहा कि राहुल को अपने दावों को साबित करने के लिए हलफनामा देना चाहिए या माफी मांगनी चाहिए। आयोग ने यह भी बताया कि कांग्रेस ने मतदाता सूची संशोधन के दौरान औपचारिक शिकायत नहीं की।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने राहुल से नियम 20 (3) (ब) के तहत हलफनामा दाखिल करने को कहा, ताकि उनके दावों की जांच हो सके। आयोग ने चेतावनी दी कि अगर राहुल के दावे झूठे पाए गए, तो उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 227 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

बिहार में SIR पर विवाद

राहुल ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी 'संस्थागत चोरी' करार दिया। उनका दावा है कि यह प्रक्रिया भाजपा के इशारे पर हो रही है, ताकि मतदाता सूची में हेरफेर किया जा सके। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR के तहत नागरिकता के सबूत जैसे दस्तावेज मांगकर दलित, मुस्लिम और पिछड़े समुदायों के मताधिकार को छीना जा रहा है। यह मुद्दा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और गहरा सकता है।

राहुल गांधी का यह वीडियो और उनके 'वोट चोरी' के आरोप भारतीय राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे रहे हैं। जहां कांग्रेस और विपक्षी दल इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग और भाजपा इन दावों को निराधार बता रहे हैं। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव और इस मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई इस विवाद को और तूल दे सकती है। राहुल के इन आरोपों का असर न केवल राजनीतिक गलियारों में, बल्कि जनता के बीच चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।

ये भी पढ़ें- Rahul Gandhi ने क्यों बताया अपनी जान को खतरा? 'वोट चोरी' आरोपों के बीच इन दो नेताओं पर लगाया धमकी देने का आरोप

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