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लद्दाख हिंसा पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- डर की राजनीति बंद करें

Rahul Gandhi Ladakh violence: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार, 30 सितंबर को केंद्र सरकार से लद्दाख के लोगों के साथ तत्काल संवाद शुरू करने की अपील की। उन्होंने सरकार से कहा कि उसे "हिंसा और डर की राजनीति" बंद करनी चाहिए और हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा की निष्पक्ष न्यायिक जांच करानी चाहिए, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि लेह एपेक्स बॉडी ने बीते सोमवार को केंद्र सरकार से बातचीत का बॉयकॉट करते हुए कहा कि जब तक हिंसा की निष्पक्ष जांच नहीं होगी तब तक वार्ता संभव नहीं है। बता दें कि 24 सितंबर को लेह में गोलीबारी में 4 युवाओं की जान चली गई थी जिसके बाद से हालात और बिगड़ते नजर आएं।

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त्वासांग थरचिन की मौत पर क्या बोले?

अब इसी गोलीकांड पर राहुल गांधी ने X पर पोस्ट में बताया कि मृतकों में से एक शख्स सैनिक परिवार से था। उन्होंने लिखा-"पिता सैनिक, बेटा भी सैनिक-उनका खून देशभक्ति से भरा है। फिर भी भाजपा सरकार ने देश के इस बहादुर बेटे की जान ले ली, सिर्फ इसलिए कि उसने लद्दाख और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। पिता की दुखी आंखें आज एक सवाल पूछ रही हैं-क्या यही है देश सेवा का इनाम?"

'लद्दाख के लोगों के साथ धोखा हुआ': राहुल गांधी

राहुल गांधी ने इस मौत को "हत्या" करार देते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया- हमारी मांग है कि लद्दाख में हुई इन हत्याओं की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। मोदी जी, आपने लद्दाख के लोगों के साथ विश्वासघात किया है।

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि लद्दाख के लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग अपने अधिकार कि मांग रहे हैं। केंद्र सरकार उनसे बातचीत करे और हिंसा व डर की राजनीति बंद करें।

बता दें कि बीते 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय BJP कार्यालय में आग लगने के बाद हिंसा भड़की। इस झड़प में चार लोग मारे गए। इसके दो दिन बाद, प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया। उन पर "हिंसा भड़काने" का आरोप लगाया गया है।

कौन थे त्वासांग थरचिन?

झड़पों में मारे गए चार लोगों में एक रिटायर सैनिक त्वासांग थरचिन भी शामिल थे। त्वासांग थरचिन 1996 से 2017 के बीच लद्दाख स्काउट्स के अंग रहे। उन्होंने 1999 में कारगिल की लड़ाई भी लड़ी थी। उनके पिता भी सेना में थे और उन्होंने भी कारगिल युद्ध लड़ा था। त्वासांग रिटायरमेंट के बाद अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहते थें और लेह में कपड़े की दुकान चला रहे थे।

कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी और संचार प्रमुख जयराम रमेश ने भी ट्वीट में कहा कि त्वासांग थरचिन ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग की थी। रमेश ने बताया कि थारचिन ने सियाचिन ग्लेशियर पर सेवा की और 1999 की कारगिल युद्ध में बहादुरी से लड़ा। उनके पिता भी भारतीय सेना में सेवा कर चुके हैं।

क्या है छठी अनुसूची ?

लद्दाख के लोग यूनियन टेरीटरी को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। यह अनुसूची, संविधान के अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के तहत, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान करती है।

सोनम वांगचुक और अन्य कार्यकर्ता लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल कराने के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। इसका उद्देश्य स्वायत्त जिला परिषद की स्थापना करना है, जिससे स्थानीय लोगों को कुछ विधायी और न्यायिक अधिकार मिल सकें। वर्तमान में छठी अनुसूची केवल पूर्वोत्तर के चार राज्यों पर लागू है।

राहुल गांधी का यह बयान केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती पेश कर सकता है। कांग्रेस इसे लद्दाख के लोगों के अधिकारों और न्याय की मांग के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा इसे "हिंसा और अस्थिरता" का मुद्दा बता रही है। विश्लेषकों का मानना है कि लद्दाख का मामला आगामी महीनों में राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बन सकता है, खासकर जब स्थानीय अधिकार और स्वायत्तता की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

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