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टीम राहुल के मुताबिक राहुल गांधी बहादुर, मिलिंद देवड़ा पद के लालची!

Rahul Gandhi
नई दिल्‍ली। गुरुवार को मुंबई साउथ से इस बार का लोकसभा चुनाव हारने वाले कांग्रेस के सांसद और पूर्व मंत्री मिलिंद देवड़ा ने चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के लिए राहुल गांधी की उस टीम को जिम्‍मेदार ठहराया था जो चुनावों के दौरान राहुल गांधी को सलाह देने का काम करती थी।

मिलिंद की इस आलोचना का जवाब अब टीम राहुल ने भी दिया है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस में राहुल की टीम की ओर से दिया गया बयान छपा है।

पढ़ें-राहुल गांधी की वह टीम जिसने डुबाई कांग्रेस की लुटिया

राहुल के करीबी ने दिया बयान
मिलिंद ने साफ-साफ शब्‍दों में कहा था कि टीम के ज्‍यादातर सदस्‍य जमीनी हकीकत से दूर थे और उन्‍हें चुनावों को कोई अनुभव ही नहीं था। इसके साथ ही मिलिंद ने यह भी कहा था कि सलाह देने वालों के साथ ही साथ सलाह लेने वालों की भी जिम्‍मेदारी होती है।

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष की कोर टीम के एक अहम सदस्‍य ने कहा है कि जो लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं वह सिर्फ पद के लालच में इस तरह के बयान दे रहे हैं।

टीम के इस सदस्‍य ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि राहुल गांधी को दोष देने वाले जानते हैं कि उनके पास अब कुछ भी नहीं बचा है और इसलिए वह ऐसी बातें कर रहे हैं।

पद की लालच में दे रहे ऐसे बयान
सरकार में शामिल कुछ नेताओं और मंत्रियों ने नकारात्‍मक माहौल बनाया जिसकी वजह से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। हार की जिम्‍मेदारी लेने के बजाय यह लोग बड़े पद की लालसा में इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

टीम के जिस सदस्‍य ने यह बयान दिया है वह राहुल गांधी का काफी करीबी है और इस सदस्‍य के मुताबिक पार्टी को जितने भी वोट्स मिले हैं वह सिर्फ राहुल की बदौलत ही मिले हैं अन्‍यथा पार्टी को एक बड़ी हार का सामना करना पड़ता।

राहुल ने बहादुरी से लड़ी लड़ाई
इस सदस्‍य ने साफतौर पर कहा कि इस बयान को विद्रोह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह मंत्री और नेता यूपीए सरकार के खिलाफ गुस्‍से के स्‍तर और उसकी गहराई को समझना नहीं चाहते हैं।

राहुल की टीम ने इस हमले को गलत करार दिया है और टीम की मांग है कि कांग्रेस और यूपीए सरकार के बीच जो अंतर है उसे साफ करना चाहिए। टीम का दावा है कि पार्टी को यूपीए सरकार की वजह से हार का सामना करना पड़ा न कि पार्टी की वजह से।

राहुल के इस करीबी के मुताबिक राहुल गांधी तो सरकार का हिस्‍सा ही नहीं थे तो ऐसे में उन्‍हें जिम्‍मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। महंगाई और भ्रष्‍टाचार को लेकर लोगों में खासा गुस्‍सा था और इसे सरकार ने नहीं समझा। टीम के मुताबिक कुछ भी हो राहुल गांधी ने चुनावी लड़ाई काफी बहादुरी से लड़ी।

टीम का यह सदस्‍य राहुल के लिए चुनावी भाषणों को तैयार करता था और इसकी मानें तो पार्टी के कैंपेन में कहीं कोई खराबी नहीं थी।

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