अमेठी में क्यों हारे राहुल गांधी? स्मृति ईरानी ने किया ये दावा

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार तंज कसते हुए कहा है कि वे अपनी पार्टी के 'राजनीतिक स्वामी' हैं। उन्होंने कहा कि इसी 'अहंकार' की वजह से वे उस सीट पर हार गए जो चार दशकों से उनके 'परिवार' के पास थी।

केरल के कोच्चि में मलयालम मनोरमा ग्रुप के मनोरमा न्यूज कॉन्क्लेव 2023 में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा है कि अभी जो विपक्षी दलों का गठबंधन बना है, उससे वह 2019 में ही अमेठी में लड़ चुकी हैं, जहां उन्होंने राहुल गांधी को हराया था।

smriti irani on rahul gandhi

'राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक मालिक हैं'
उनसे सवाल किया गया कि बीजेपी केरल में एक भी सीट क्यों नहीं जीत पाती और क्या इसके लिए वो यहां राहुल गांधी के खिलाफ खड़ी होंगी। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा, 'राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक मालिक हैं और मैं बीजेपी की एक राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। राजनीतिक स्वामी और एक कार्यकर्ता होने में बहुत बड़ा राजनीतिक अंतर है।'

अहंकार की वजह से हारी कांग्रेस- ईरानी
उन्होंने कहा, 'मैं समझती हूं कि यह अहंकार ही है कि जिसने कांग्रेस पार्टी की, यहां तक कि जिसे अमेठी लोकसभा क्षेत्र कहते हैं, जहां से पिछले साढ़े चार वर्षों से मैं सांसद हूं, वह पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार में जमानत तक गंवा बैठी।' उन्होंने कहा कि 2019 में कांग्रेस के पास अमेठी में 4 लाख से ज्यादा वोट थे, 'जो उनके परिवार के पास करीब चार दशकों से थी' और अब घटकर 1.2 लाख रह गए हैं।

आखिर बीजेपी के कार्यकर्ता जीतते हैं- स्मृति
केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मैं समझती हूं कि यह इस बात का संकेत है कि भले ही कई इलाकों में विपक्षी दलों का दशकों पुराना गढ़ रहा है.....इसमें समय लगता है लेकिन आखिरकार बीजेपी के कार्यकर्ता जीत हासिल करने में सफल होते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी अमेठी में अकेले नहीं लड़ी थी।

वो बोलीं कि 'वे समाजवादी पार्टी और बहुजन पार्टी के समर्थन से लड़े थे। इसलिए आप जो आज राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन देख रहे हैं, इससे मैं अमेठी में 2019 में ही लड़ चुकी हूं।' उन्होंने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक को लेकर कहा कि अगर आप इन राजनीतिक ताकतों के 'मिश्रण' को करीब से देखेंगे तो 'उनके बीच दरारें और टूट काफी स्पष्ट हैं...।'

उन्होंने दावा किया कि जिस तरह से सभी विपक्षी पार्टियां नरेंद्र मोदी को हराने के इरादे से एक साथ आई हैं, यह उनके तीसरे बार जीतने के सबसे बड़ा संकेत है। उन्होंने पीएम मोदी की ओर से कुछ समय पहले तीसरी बार लौटने को लेकर की गई टिप्पणी से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा, 'एक पर्याप्त नहीं था, उन्हें इस राजनेता को चुनौती देने के लिए कई तरह की राजनीतिक शक्तियों की जरूरत थी। अगर ये आपको 2024 में चुनावी सफलता का संकेत नहीं देता है, तब आपको और क्या चाहिए...... ' (इनपुट-पीटीआई)

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