दुनिया का बोझ उठाने वाले कुलियों के मसीहा बनेंगे राहुल गांधी!

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव का सियासी पारा अपने पूरे शबाब पर है। इसलिए हर पार्टी की कोशिश है कि वह आम आदमी को अपनी और आकर्षित कर सके। जिसके तहत ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रेलवे के कुलियों से बातचीत की।

राहुल ने रेलवे के कुलियों से मिलकर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की। राहुल ने कुलियों के साथ रेलवे स्टेशन पर करीब दो घंटे गुजारे। राहुल से मिलने के बाद दिल्ली रेलवे स्टेशन के कुली हद से ज्यादा खुश नजर आये।

राहुल ने पूरे ध्यान से कुलियों की समस्याएं सुनी और कहा कि हम और हमारी पार्टी गरीब रेखा से नीचे रह रहे और मध्यवर्ग के बीच रह रहे लोगों के लिए ‘मूलभूत न्यूनतम अधिकार' लाने की कोशिश कर रही है। हमारी कोशिश है कि उनलोगों को फायदा मिले। क्योंकि उन्हें भी सपने देखने और आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है।

कुंडली भी कहती है कि राहुल नहीं बन पायेंगे पीएम

राहुल ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के कुलियों से कहा मैं वादा करता हूं कि मैं आप सबकी बेहतरी के लिए जो कुछ कर पाऊंगा वो करूंगा। राहुल गांधी ने कहा कि जब कुली अपना काम करने के दौरान जख्मी हो जाते हैं तो उन्हें भी पूरा हक है कि उनका अच्छे ढंग से इलाज हो, उन्हें भी स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। राहुल ने पूरी तन्मयता के साथ कुलियों से बातचीत की।

राहुल से मिलने के बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के कुली काफी खुश दिखे। एक ने तो राहुल के सामने ही मीडिया से कहा.. फिल्म कुली में हीरो अमिताभ बच्चन ने कि सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं... गाना गाकर अपनी किस्मत बदल दी। लेकिन हमारी किस्मत में कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ लेकिन आज जब मैं राहुल जी से मिला तो मुझे लगने लगा कि कि शायद अब अमिताभ बच्चन की तरह हमारी भी किस्मत बदल जायेगी क्योंकि हमें भी सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हक है।

कुली के इस बयान पर खुद राहुल गांधी भी मु्स्कुराये बिना नहीं रह पाये, उन्होंने उसे हाथ जोड़कर कहा कि मैं पूरी कोशिश करूंगा कि अपना वादा पूरा करूं। मालूम हो कि आजकल राहुल गांधी के ही कहने पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुलियों के साथ वार्ता का आयोजन किया गया था जो कांग्रेस द्वारा समाज के विभिन्न तबके से प्रतिक्रिया हासिल की जाये।

इसी आधार पर राहुल गांधी साल 2014 के लोकसभा चुनावों का घोषणापत्र जारी करेगी। राहुल ने अब तक अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों, युवाओं, महिलाओं और पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की है इसके बाद अब किसानों का नंबर है।

देखते है कि राहुल गांधी की यह कोशिशें आगामी लोकसभा चुनावों में क्या रंग लाती है और क्या जिस तरह से देश में कांग्रेस विरोधी हवा चल रही है उसका रूख बदल पाती है या नहीं?

वैसे आपकी क्या राय है इस बारे में अपनी बात नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।

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