हार के बाद राहुल के सामने चुनौतियों का पहाड़

नयी दिल्ली। दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत और कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी के माथे पर बल पड़ना तय माना जा रहा है। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की स्थिति ने उनके खिलाफ

जनाक्रोश को जगजाहिर कर दिया है। सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखे जा रहे इन विधानसभा चुनावों में पार्टी की खास्ता हालत लोकसभा चुनावों में उनकी स्थिति को तय कर रही है। कुछ महीनों में लोकसभा चुनाव भी होने है ऐसे में कांग्रेस का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है।

जाहिर है पार्टी का प्रदर्शन अगर खराब होता है तो दोष मुखिया के माथे ही मढ़ा जाएगा। कांग्रेस की हार के बाद राहुल के सामने चुनौतियों का पहाड़ है। ऐसे में उन्हें लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें इन चुनौतियों से निपटने का तोड़ निकलना होगा।
राहुल गांधी को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कई चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी में उनकी हैसियत औपचारिक तौर पर नंबर दो होने के बावजूद उनकी कई महत्वाकांक्षी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पाई हैं और कुछ राज्यों में

उनकी राजनीतिक जमीन सिकुड़ती जा रही है। मोदी नाम का फैक्टर जहां भाजपा की जीत का कारण बना है तो वहीं कांग्रेस के सफाए में अहम वजह। जो फाइट अब तक राहुल और मोदी के बीच मानी जा रही थी उसमें कांग्रेस की हार ने पार्टी में नेतृत्व के बदलाव की ओर इशारा कर दिया है। यहां आपको ऐसी कुछ चुनौतियों के बारे में बता रहे है जिनका सामना राहुल गांधी को हाल के दिनों में करना होगा।

लोकसभा चुनाव

लोकसभा चुनाव

देश के चार अहम राज्यों में कांग्रेस की हार ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले राहुलं गांधी को पार्टी में अपना विकल्प ढ़ूढ़ना होगा। विधानसभाओं में पार्टी की हार ने उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल खड़ा कर दिया हा। ऐसे में उन्हें अपने माथे से ये कलंक मिटाना होगा।

'स्टाइल' का इम्तिहान

'स्टाइल' का इम्तिहान

कांग्रेस के उपाध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार और घोषणापत्र तक अपनी देखरेख में तैयार करवाया। बावजूद इसके पार्टी का प्रदर्शन आशा के विपरीत रहा। कांग्रेस के दिग्गज नेता अपनी सीट तक बचाने में कामयाब नहीं हुए। हलांकि राहुल ने चुनाव के तौर तरीकों में कई बड़े बदलाव करने की कोशिश की है। लेकिन उनका स्टाइल चल नहीं पाया। ऐसे में अब उन्हें रणनीति पर काम करने की जरुरत है।

मोदी से सामना

मोदी से सामना

कांग्रेस ने राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा किया, लेकिन मोदी मैजिक के सामने राहुल का वार फीका पड़ गया है। ऐसे में राहुल गांधी को आगामी चुनाव से पहले मोदी का तोड़ ढ़ूढ़ना होगा। मोदी का सामना करने के लिए कांग्रेस को पूरी तैयारी करनी होगी।

कांग्रेस में गुटबाजी और झगड़ा

कांग्रेस में गुटबाजी और झगड़ा

कांग्रेस में बने धड़ों में हो रहे झगड़े को रोकने के लिए राहुल गांधी ने कई बार कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच गुटबाजी तो राजस्थान में अशोक गहलोत और जोशी के बीच मतभेद इनता ही नहीं छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के बीच गुटबाजी राहुल के लिए बड़ी चुनौती है। गुटबाजी रोकने के लिए राहुल गांधी ने कई बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया है और नेताओं को डांट लगाई है। लेकिन बावजूद इसके पार्टी के भीतर इस तरह के संघर्ष रुक नहीं रहे हैं।

राहुल की खुद से चुनौती

राहुल की खुद से चुनौती

पार्टी की हार के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व और उनके सिस्टम पर गंभीर सवाल उठने लगे है। विधानसभा चुनाव में हार का मतलब कांग्रेस में राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही बदलाव की प्रक्रिया का धीमा पड़ना है। हलांकि माना जा रहा है कि राहुल के फेल होने के बाद सोनिया गांधी फिर से कमान संभाल लेंगी। ऐसे में राहुल को खुद के भीतर झांकने की जरुरत है।

अपराधियों और वंशवादी नेताओं

अपराधियों और वंशवादी नेताओं

राहुल गांधी की नई स्टाइल की इस बात को लेकर भी आलोचना होती है कि उनका तरीका ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने से नहीं रोक पाए जिनका रिकॉर्ड आपराधिक था। साथ ही वे ऐसे उम्मीदवारों की संख्या भी कम नहीं कर पाए जो वंशवाद के आधार पर अपना दावा ठोकते हैं। ऐसे में राहुल गांधी को इस समस्या से निजात पाने के लिए ठोस कदम उठानी होगी।

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