कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मान ली हार, विपक्ष में बैठने को तैयार, समर्थन सं साफ इंकार

16वीं लोकसभा चुनाव को लेकर विभिन्न ओपिनियन पोलों और सर्वे में कांग्रेस की स्थिति कमजोर बताए जाने को अब पार्टी के कई नेताओं के साथ-साथ राहुल गांधी भी स्वीकार करने लगे हैं।
एक अखबार को दिए साक्षात्कार में पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति नहीं होगी है तो वह विपक्ष में बैठने को तैयार है। उन्होंने राहुल गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वह कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए कई दलों के साथ गठबंधन को राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि इस तरह के गठबंधन से बनी सरकार कभी सफल नहीं होती है, इससे बेहतर है कि हम विपक्ष में बैठे।
सूत्रों के अनुसार एक कांग्रेस नेता ने बताया कि राहुल पार्टी के प्रदर्शन को लेकर कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। वह गठबंधन में बदलाव चाहते हैं, खासतौर पर उन राज्यों में जहां पार्टी पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव अधिक है। राहुल युवा सोच को महत्व देते हैं इसलिए उनका मानना है कि संगठन का पुनर्निमाण किया जाए। परंतु पार्टी के कुछ नेता राहुल के इस सोच का विरोध कर रहे हैं। चुनाव परिणामों को लेकर भी पार्टी में दोहरी मानसिकता है। एक पक्ष मानता है कि इस बार लोस चुनाव में पार्टी का जनाधार पूरी तरह से कम हो गया है तो दूसरा पक्ष मानता है कि पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी।












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