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क्‍या अरुण जेटली निधन के बाद गए थे राहुल गांधी को धमकाने? कांग्रेस नेता का दावा बेमतलब, अब बेटे ने दिया जवाब

Rahul Gandhi on Arun Jaitley: नई दिल्ली में आयोजित एनुअल लीगल कॉन्क्लेव-2025 (Annual Legal Conclave 2025) के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार, 2 अगस्त को एक चौंकाने वाला बयान दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें कृषि कानूनों के खिलाफ बोलने से रोकने के लिए दिवंगत बीजेपी नेता अरुण जेटली को भेजा था। राहुल गांधी के इस दावे के बाद दिवंगत नेता के बेटे रोहन जेटली ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पलटवार किया है।

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राहुल गांधी का दावा: "अरुण जेटली ने धमकाया था"

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा, "जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था, तो अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया। उन्होंने मुझसे कहा, 'अगर तुम सरकार का विरोध करते रहोगे, कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहोगे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी।' मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, 'आपको नहीं पता आप किससे बात कर रहे हैं।'"

राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया जब वह केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल रही है और जब कोई आवाज उठाता है, तो उसे दबाया जाता है।

रोहन जेटली ने राहुल को घेरा

अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने राहुल गांधी के बयान को 'असंवेदनशील' करार दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी अब यह दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता, अरुण जेटली ने उन्हें फार्म लॉज पर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि मेरे पिता का 2019 में निधन हो गया था, जबकि फार्म लॉज 2020 में लाए गए थे। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मेरे पिता कभी किसी को उसके विचारों के लिए धमकाने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे जो बातचीत और सहमति से समाधान निकालने में विश्वास करते थे।"

उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी को उन लोगों के बारे में बोलते वक्त सावधान रहना चाहिए जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के अंतिम दिनों को भी राजनीति का विषय बनाया था, जो बेहद खराब स्वाद की बात थी।"

सवाल खड़ा: जब कानून बना ही नहीं था, तब धमकी कैसे मिली?

खास बात यह है कि जिन तीन कृषि कानूनों को लेकर राहुल गांधी ने यह दावा किया है, वे 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश के रूप में पेश किए गए थे, और बाद में सितंबर 2020 में संसद में पारित किए गए थे।

  • किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020
  • किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अधिनियम, 2020
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020
  • इन कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय तक किसान आंदोलन चला, जिसके बाद नवंबर 2021 में इन्हें रद्द कर दिया गया।

बता दें कि अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (2014-2019) में थे। उन्होंने वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। वह संसद में सरकार की प्रमुख आवाज थे और आर्थिक सुधारों जैसे GST, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, और बैंकिंग सेक्टर सुधार के शिल्पकार माने जाते हैं।

जेटली इससे पहले वाजपेयी सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री, कानून एवं न्याय मंत्री भी रह चुके थे। 2009 से 2014 तक वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता और फिर 2014 से 2019 तक राज्यसभा में सदन के नेता थे।

राहुल गांधी के इस बयान ने न केवल एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव को हवा दी है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि दिवंगत नेताओं को लेकर कितनी संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए। रोहन जेटली के पलटवार से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भावनाओं और सम्मान का भी है।

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