रैगिंग शर्मनाक कृत्य है: जस्ट‍िस काटजू

नई दिल्ली। जस्टि‍स मार्कंडेय काटजू ने इस बार एक नए सामाजिक मुद्दे पर अपनी राय ज़ाहिर की है। रैगिंग को शर्मनाक कृत्य करार देते हुए भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मार्कंडेय काटजू ने कहा कि इससे छात्रों का मनोबल गिर सकता है।

katju statement

जस्ट‍िस ने कहा कि इससे वे आत्महत्या के कगार तक भी पहुंच सकते हैं। दरअसल ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में बिहार के एक छात्र के साथ कथित रैगिंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, हमें ब्रिटिश काल के सभी कृत्यों की नकल करने की आवश्यकता नहीं है।

पढ़ें- बिहार की हालत
वे बोले कि जब यह रैगिंग जैसा बुरा कृत्य हो। मेरे विचार से रैगिंग एक शर्मनाक कृत्य है और इसे किसी भी हाल में रोका ही जाना चाहिए। अपने ब्लॉग पर उन्होंने लिखा, यह समझना चाहिए कि कोई नया छात्र संस्थान में आम तौर पर डरा होता है।

इसे लेकर वह आशंकित रहता है क्योंकि वह नए माहौल में आया होता है। उसे भावनात्मक सहयोग और अपने वरिष्ठों से मदद की जरूरत होती है। ऐसे में यदि रैगिंग जैसी शर्मनाक हरक़त उसके साथ होती है तो उसे अवसाद घेर लेता है।

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