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राफेल की कीमत पर सवाल उठाने वाली रिपोर्ट पर सरकार की सफाई- खबर में तथ्‍य गलत, हर प्रक्रिया का पालन किया गया

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नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर गुरुवार को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट पर सरकार की ओर से सवाल खड़े किए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बारे में मीडिया में जो रिपोर्ट है वो एक बार फिर तथ्यों से पर और कुछ खास बातें उठाकर भ्रम पैदा करने वाली है। साथ ही रिपोर्ट भी कई तथ्यात्मक गलतियां भी हैं। सरकार पहले भी कह चुकी है कि रक्षा खरीद प्रक्रिया और इससे जुड़ी सभी दिशानिर्देशों और प्रावधानों का पालन करते हुए 36 राफेल लड़ाकू विमान का सौदा किया गया है।

 नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर गुरुवार को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बारे में मीडिया में जो रिपोर्ट है वो एक बार फिर तथ्यों से पर और कुछ खास बातें उठाकर भ्रम पैदा करने वाली है। साथ ही रिपोर्ट भी कई तथ्यात्मक गलतियां भी हैं। सरकार पहले भी कह चुकी है कि रक्षा खरीद प्रक्रिया और इससे जुड़ी सभी दिशानिर्देशों और प्रावधानों का पालन करते हुए 36 राफेल लड़ाकू विमान का सौदा किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में डिफेंस एक्यूशन कोसिंल ने राफले विमान की जरूरत को रखा। एक्यूशन मैनेजर और कांट्रैक्ट निगोशिएशन कमिटी ने इसे जरूरी बताया। कैबिनेट कमेटी ने इस एक्यूशन को 24 अगस्त, 2016 को अपनी मंजूरी दी ना कि सितंबर, 2016 में। बता दें कि राफेल विमान की खरीद को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की खबर में कई दावे किए गए हैं। खबर के मुताबिक, साल 2016 में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और फ्रांस के रक्षा मंत्री के बीच इस डील पर हस्ताक्षर से एक महीने पहले रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राफेल के मानक कीमत पर आपत्ति जताई थी। तब वे अधिकारी रक्षा मंत्रालय में ही ज्वाइंट सेक्रेटरी और एक्यूशन मैनेजर और कांट्रैक्ट निगोशिएशन कमिटी में शामिल थे, उन्होंने इस मामले में कैबिनेट को एक नोट भी लिखा था। खबर के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारी की आपत्तियों के कारण इस सौदे को मंजूरी देने में देरी भी हुई, हालांकि उनकी आपत्तियों को रक्षा मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने खारिज कर दिया तब जाकर डील को मंजूरी दी गई। सूत्रों के मुताबिक, राफेल पर दर्ज की गई आपत्ति अभी कैग के पास है।

सरकार से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में डिफेंस एक्यूशन काउंसिल के इसको लेकर फैसला हुआ और कांट्रैक्ट निगोशिएशन कमेटी को भी भेजा गया। वहीं कैबिनेट कमेटी ने इस एक्यूशन को 24 अगस्त, 2016 को अपनी मंजूरी दी ना कि सितंबर, 2016 में।

राफेल डील: रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने विमानों की खरीद पर जताई थी आपत्ति, कैग के पास है नोट- सूत्र

बता दें कि राफेल विमान की खरीद को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की खबर में कई दावे किए गए हैं। खबर के मुताबिक, साल 2016 में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और फ्रांस के रक्षा मंत्री के बीच इस डील पर हस्ताक्षर से एक महीने पहले रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राफेल के मानक कीमत पर आपत्ति जताई थी। तब वे अधिकारी रक्षा मंत्रालय में ही ज्वाइंट सेक्रेटरी और एक्यूशन मैनेजर और कांट्रैक्ट निगोशिएशन कमिटी में शामिल थे, उन्होंने इस मामले में कैबिनेट को एक नोट भी लिखा था।

खबर के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारी की आपत्तियों के कारण इस सौदे को मंजूरी देने में देरी भी हुई, हालांकि उनकी आपत्तियों को रक्षा मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने खारिज कर दिया तब जाकर डील को मंजूरी दी गई। सूत्रों के मुताबिक, राफेल पर दर्ज की गई आपत्ति अभी कैग के पास है।

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English summary
Rafale fighter aircraft media report suffers several factual errors: Official sources
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