Puri Rath Yatra: वार्षिक रथ यात्रा के लिए जगन्नाथपुरी में विशेष तैयारियां, VIDEO
Puri Rath Yatra 2023 की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हर साल भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के लिए तीन भव्य रथों का निर्माण कराया जाता है। लकड़ी से तैयार किए जाने वाले इन रथों को सजाने का काम किया जा रहा है।
पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा में हर साल लाखों लोग उमड़ते हैं। अंतिम तैयारियां चल रही हैं। इस साल यात्रा 20 जून को निकलेगी। पुरी पुलिस विभाग ने विशेष इंतजाम किए हैं। जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले पुरोहित भी खास तैयारियों में जुटे हैं।

भगवान बलभद्र के रथ के मुख्य बढ़ई बालकृष्ण मोहराणा बताते हैं कि पुरी में रथ यात्रा की अंतिम तैयारियां हो रही हैं। उन्होंने बताया, "...हमें यात्रा से दो दिन पहले सभी तैयारियां पूरी करने के आदेश मिले हैं। इसलिए, हम उसी के अनुसार काम कर रहे हैं। 90% काम हो चुका है..."
पुरी के महानिरीक्षक आशीष कुमार सिंह ने कहा, ट्रैफिक रेगुलेशन के साथ-साथ कॉर्डन ड्यूटी, तट की सुरक्षा और रथ को खींचने के लिए हमारे पास पर्याप्त तैनाती है...लगभग 10,000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा...परसों फुल ड्रेस पूर्वाभ्यास किया जाएगा।
बता दें कि हर साल भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की लकड़ी से बनी प्रतिमाओं को मंदिर से बाहर लाकर रथारुढ़ किया जाता है।तीनों विग्रह मौसी के घर ले जाए जाते हैं। इस वार्षिक रथ यात्रा में दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं।
माना जाता है कि पुरी की रथ यात्रा का रथ खींचने से इंसान के सारे पापों का खात्मा होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है, उसका घर-आंगन हमेशा खुशियों से भरा रहता है। यात्रा के एक दिन पहले वो भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं।
रथ यात्रा के एक दिन पहले वाले दर्शन को 'नबाजौबन दर्शन' कहा जाता है, क्योंकि दर्शन के दौरान तीनो भगवान युवावस्था में होते है। इससे पहले 15 दिनों तक मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।
दरअसल परंपरा ये है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि को तीनों भगवान सहस्त्रधारा स्नान करते हैं और इसके बाद तीनों लोग बीमार पड़ जाते हैं, जिसके लिए इन तीनों का एकांतवास में उपचार होता है और इसलिए 15 दिनों तक मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।












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