पंजाब की पंचायतों का फरमान- अगर किसान आंदोलन नहीं गए दिल्ली, तो भरना होगा जुर्माना, होगा बहिष्कार
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस(Republic day) पर ट्रैक्टर परेड(Tractor parade) के दौरान कुछ जगहों पर हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन(Farmers protest) को कमजोर माना जाने लगा था। अब किसान नेता राकेश टिकैत(Rakesh Tikait) के आह्वान पर हरियाणा(Haryana) और उत्तर प्रदेश की खाप पंचायतों के बाद पंजाब(punjab) की पंचायतें भी किसान आंदोलन को तेज करने में जुट गईं हैं। बठिंडा की विर्क खुर्द पंचायत ने शुक्रवार को की और धरने में न जाने पर 1500 रुपये जुर्माने का प्रस्ताव पास किया। अगर कोई पंचायत का आदेश नहीं मानता है तो उसका गांव में बहिष्कार किया जाएगा।

पंजाब की पंचायतों ने पारित किया जुर्माने का प्रस्ताव
बठिंडा(Bathinda) जिले में आने वाले विर्क खुर्द की ग्राम पंचायत की ओर से लिए गए फैसले के मुताबिक, गांव के हर परिवार के एक सदस्य को दिल्ली के आंदोलन में जाना होगा। अन्यथा उन पर 1500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा यदि जुर्माना नहीं दिया तो भी इसके परिणामस्वरूप सामाजिक बहिष्कार होगा। इसके बाद पटियाला जिले की छह ग्राम पंचायतों वजीदपुर, बलबेड़ा, डकाला, कक्केपुर, खेड़ी गुरना और खानपुर बंगर ने शनिवार को प्रस्ताव पारित किया।

दिल्ली ना जाने पर लगेगा इतना जुर्माना
गांव खेड़ी गुरना की पंचायत ने तय किया है कि गांव से जाने वाले लोगों के प्रत्येक एक चक्कर में आठ लोग जाएंगे और चार दिन दिल्ली बार्डर पर रहेंगे। अगर किसी ने नहीं जाना तो उसे प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान करना होगा या फिर उसे अपने बदले किसी अन्य व्यक्ति को भेजना होगा। हर किसान से प्रति किले दो सौ रुपये भी वसूल किए जाएंगे। यह राशि किराये पर खर्च होगी। यह भी तय किया गया है कि दिल्ली जाने वाले किसान अपने साथ आवश्यक राशन सामग्री भी लेकर जाएंगे।

पर्ची डाली तय की गई बारी
सरपंच मंजीत कौर ने बताया, 'जो धरना स्थल पर नहीं जाएगा उसे 1500 रुपये का जुर्मान लगेगा और यदि वह जुर्माना नहीं भरता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। फिरोजपुर के दिलाराम गांव में किसान नेताओं ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिस पर सभी के हस्ताक्षर करवाए गए हैं। जिन किसानों के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली है, उनकी बारी कब आएगी, इस संबंध में पर्ची डाली गई।

पंचायत ने की ये खास अपील
गांव खानपुर बंगर की पंचायत ने तय किया है कि आंदोलन में न जाने वाले किसान परिवार से 1100 रुपये जुर्माना लिए जाएंगे। उसे न्यूनतम सात दिन दिल्ली के बॉर्डर पर रहना होगा। अगर आंदोलन में किसी के वाहन को कोई नुकसान होता है, तो पूरे गांव की जिम्मेदारी होगी कि वह नुकसान की भरपाई करेगा। भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) गांव के गुरुद्वारों से यह घोषणा करने की अपील कर रहा है कि दिल्ली की सीमा पर आंदोलन का दौर फिर से शुरू हो गया है। टीवी पर समाचारों में आंदोलनकारियों की वापसी के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि इसके विपरीत, भीड़ दोगुनी हो गई है। दिल्ली में इंटरनेट सेवा चालू नहीं है।












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