PT Usha : 37 साल पहले आज के दिन पीटी उषा ने रचा था इतिहास, आज तक कोई भारतीय धावक नहीं तोड़ सका रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 30 सितंबर: उड़न परी के नाम से मशहूर भारतीय धावक पीटी उषा ने 37 साल पहले आज ही के दिन छठे एशियाई ट्रैक एंड फील्ट मीट के दौरान जकार्ता में 5 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीतकर एथलेटिक्स की दुनिया में इतिहास रचा था। पीटी उषा ने ट्वीट कर खुद इसके बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे अभी तक कोई भी किसी भी पुरुष या महिला एथलीट तोड़ नहीं पाया।

1985 में एशियाई ट्रैक-एंड-फील्ड की क्वीन के रूप में खुद को किया स्थापित
साल 1984 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पीटी उषा 400 मीटर की हर्डल रेस में मामूली से अंतर से एक ऐतिहासिक पदक से चूकने के बाद काफी चर्चित एथलीट बन गईं थीं। इसके बाद उन्होंने 1985 के एशियाई चैंपियनशिप में खुद को एशियाई ट्रैक-एंड-फील्ड की क्वीन के रूप में स्थापित करने वाला कारनामा कर दिखाया। पीटी उषा ने इंडोनेशिया के जकार्ता के सेन्या मैड्या स्टेडियम में एक इवेंट में छह मेडल्स जीते। इनमें 5 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल था।

पीटी उषा का ये रिकॉर्ड अभी तक नहीं तोड़ पाया कोई भारतीय धावक
पीटी उषा के इस रिकॉर्ड को अभी तक कोई भी भारतीय धावक नहीं तोड़ पाया है। ट्रैक-एंड-फील्ड क्वीन के अंदर ऐसा कुछ करने की इच्छा उस समय की सबसे तेज धावक फिलिपिनो स्प्रिंट स्टार लिडिया डी वेगा को देखकर जागी। उनकी ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता का पहला अध्याय 1982 के एशियाई खेलों में शुरू हुआ था, जहां लिडिया ने पीटी उषा को 100 मीटर गोल्ड मेडल में पीछे छोड़ दिया था।

400 मीटर का गोल्ड जीतकर की शानदार वापसी
एक साल बाद यानी साल 1983 के एशियाई चैंपियनशिप में 200 मीटर में लिडिया डी वेगा ने एक बार फिर पीटी उषा को शिकस्त दी। हालांकि, भारतीय धावक ने 400 मीटर का गोल्ड जीतकर शानदार वापसी की। इसके बाद साल 1985 एशियन चैंपियनशिप में पद्म श्री पुरस्कार विजेता के लिए यह सिर्फ गोल्ड मेडल जीतने की बात नहीं थी। पीटी उषा ने एक अखबार को इंटरव्यू में कहा था, ''ये बहुत गर्व की बात थी और एशिया में सर्वश्रेष्ठ होना उससे भी बड़ी बात थी।''












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