Protest Against Privatisation:देशभर में निजीकरण के खिलाफ क्यों हो रहे हैं आंदोलन, जानिए

नई दिल्ली: इस हफ्ते दो दिन बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे और आज जीवन बीमा निगम के कर्मचारी निजीकरण के प्रस्तावों के विरोध में हड़ताल पर हैं। बैंकों में हड़ताल की वजह से दो दिनों तक बैंकों के सामान्य कामकाज पर बहुत ज्यादा असर पड़ा। एलआईसी में हड़ताल की वजह से भी उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच विपक्ष रेलवे में भी निजीकरण का आरोप लगा रहा है, जिसको लेकर रेलवे कर्मचारी यूनियन के भी कान खड़े हैं। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि रेलवे के निजीकरण का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। आइए समझते हैं कि अगर सरकारी ढर्रे से कामकाज की वजह से सरकारी कंपनियां बीमार हो चुकी हैं तो उनकी सेहत ठीक करने के नाम पर हो रहे निजीकरण का इतना विरोध क्यों हो रहा है।

बैंक कर्मचारियों का दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बैंक कर्मचारियों का दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल

पब्लिक सेक्टर बैंकों के निजीकरण की केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ बैंक यूनियनों का दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल मंगलवार को खत्म हुआ। इस हड़ताल का आह्वान 9 बैंक यूनियनों के संयुक्त संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया था। इनका दावा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के और बैंकों के निजीकरण के सरकार के फैसले के विरोध में उनके आंदोलन का समर्थन कई ट्रेड यूनियनों, कुछ किसान संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने भी किया है। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के दावे के मुताबिक इस हड़ताल में करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिससे बैंकिंग सेक्टर का पूरा कामकाज ठप पड़ गया। बैंक संगठनों की ओर से कहा गया है कि अगर सरकार को लगता है कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों के संचालन में दिक्कत है तो यूनियन सरकार की उन चिंताओं को दूर करने की कोशिश करेगा। लेकिन, सरकार का कदम देश की अर्थव्यवस्था के हक में भी नहीं है। बैंक यूनियनों ने यह भी धमकी दी है कि अगर सरकार संसद में अपनी मजबूती के दम पर उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं हुई तो वह आगे और हड़ताल करेंगे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाएंगे।

 बैंक हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को हुई परेशानी

बैंक हड़ताल के चलते उपभोक्ताओं को हुई परेशानी

15 और 16 मार्च के दिनों की बैंक हड़ताल के चलते बैंक उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मसलन, बैंकों से कैश निकालने, जमा करने , चेक भुनाने के काम में अड़चनें आईं। बैंकों से जुड़े बाकी वित्तीय ट्रांजैक्शन और सरकारी ट्रेजरी का काम भी इससे काफी प्रभावित हुआ। ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन ने भी माना है कि उनकी हड़ताल के चलते सामान्य बैंक सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंक हड़ताल के चलते करीब 2 करोड़ चेक क्लियर नहीं हो पाया, जिसके चलते 16,500 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया।

अब इंश्योरेंस कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा

अब इंश्योरेंस कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा

बैंक कर्मचारियों के बाद एलआईसी कर्मचारियो ने भी केंद्र की विनिवेश योजना के खिलाफ गुरुवार को एक दिन का हड़ताल किया है। जीवन बीमा निगम के कर्मचारी आईपीओ लाने , निजीकरण और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्तावों का विरोध कर रहे हैं। 1956 में गठित एलआईसी के पास करीब 1,14,000 कर्मचारी हैं और करीब 29 करोड़ पॉलिसी होल्डर्स हैं। ये कर्मचारी एलआईसी में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने का विरोध कर रहे हैं। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार आईपीओ के जरिए जीवन बीमा निगम में विनिवेश करेगी। अभी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी भारत सरकार के पास है। सरकार अगले वित्त वर्ष में आईपीओ लाना चाहती है। (ऊपर वाली तस्वीर-फाइल)

क्या रेलवे का भी होगा निजीकरण ?

क्या रेलवे का भी होगा निजीकरण ?

जहां तक रेलवे के निजीकरण की अटकलें हैं तो रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को संसद में साफ किया कि भारतीय रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा है कि सरकार देश की सबसे बड़ी एम्पलॉयर इंडियन रेलवे का ऐतिहासिक गौरव लौटाना चाहती है, इसीलिए उसके मद्देनजर कई जरूरी कदम उठा रही है, जिसके लिए बजट में रेकॉर्ड आवंटन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और यात्री सुविधाओं की बेहतरी के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिशें जरूर हो रही हैं, लेकिन 'रेलवे राष्ट्र की संपत्ति है और यह ऐसी ही बनी रहेगी। भारतीय रेलवे का कोई निजीकरण नहीं कर सकता।' इससे पहले रेलवे नेटवर्क पर निजी ट्रेनों को चलाने की तैयारी पर वो कह चुके हैं कि क्या सड़कों पर सिर्फ सरकारी वाहन ही चलते हैं। यानी सरकार की ओर से रेलवे के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है।

निजीकरण के पक्ष में क्यों है सरकार ?

निजीकरण के पक्ष में क्यों है सरकार ?

1 फरवरी, 2021 को पेश किए गए साल 2021-22 के आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री ने पब्लिक सेक्टर अंडटेकिंग्स (पीएसयू) और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स में विनिवेश के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य की घोषणा की थी। इसी दौरान उन्होंने लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के लिए पब्लिक आईपीओ लाने की घोषणा की थी। अगले वित्त वर्ष मे सरकार आईडीबीआई के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक जेनरल इंश्योरेंस कंपनी में विनिवेश की योजना पर काम कर रही है। वित्त मंत्री के मुताबिक सरकार विनिवेश से जुटाए गए धन को सोशल सेक्टर और विकास के कार्यों पर खर्च करना चाहती है। सीतारमण ने संसद में बजट भाषण के दौरान कहा था कि 'भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एयर इंडिया, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस और नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड के अलावा का ट्रांजैक्शन भी वित्त वर्ष 2021-22 में पूरा किए जाने का प्रस्ताव है।' वैसे बैंक हड़ताल के दूसरे दिन वित्त मंत्री ने यह भी भरोसा दिया था कि जिन बैंकों का निजीकरण होगा उनके कर्मचारियों के हितों की सरकार रक्षा करेगी।

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