अब राहुल गांधी के सुझाव को पार्टी के आला नेता तक नहीं मानते
नई दिल्ली। एक के बाद एक चुनाव में कांग्रेस की दुर्दशा के बाद राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गयी हैं। आलम यह है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता ही अब राहुल गांधी के सुझावों को मानने से इनकार करने लगे हैं। दरअसल राहुल ने पार्टी संगठन के चुनाव में बैलट वोटिंग की मांग की थी जिसे पार्टी ने खारिज कर दिया है।

लगातर पराजय के बाद कांग्रेस में आत्म मंथन का दौर जारी है और पार्टी कई तरह के फॉर्मूले पर विचार कर रही है लेकिन उपाध्यक्ष राहुल गांधी की योजनाओं को दरकिनार कर दिया गया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी की बहुचर्चित पारदर्शी योजना को पार्टी ने किनारे लगाने का फैसला ले लिया है। राहुल की योजना थी कि हर पद के चुनाव पर वोटिंग कराई जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन पार्टी ने इसे अब खारिज कर दिया है और अधिकतम सहमति की बात कही है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी ने बैलेट के बजाय जिला, प्रदेश कांग्रेस कमिटी और एआईसीसी स्तर पर चुनाव कराने पर विचार कर रही है। पार्टी के प्रमुख नेता बैलट की मांग के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से नेताओं में मतभेद बढ़ेगा। जिन नेताओ ने राहुल गांधी के बैलट चुनाव का विरोध किया है उनमें मुख्य रूप से केरल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष वी एम सुधीरन, हरियाणा में अशोक तंवर, एमपी में अरुण यादव, राजस्थान में सचिन पायलट आदि शामिल हैं।
वहीं पार्टी के आला अधिकारी का कहना है कि हमारी पहली कोशिश है कि संगठन का निष्पक्ष चुनाव हो जिसमें सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता हो। उन्होंने सोनिया गांधी का हवाला देते हुए कहा कि असम, गोवा और ओडिशा में नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति कांग्रेस नेतृत्व के आम-सहमति वाले रवैये को प्रतिबिंबित करती है। कांग्रेस हाई कमान पहले ही उन दो नाकाम अनुभवों को खारिज कर चुकी है, जो टीम राहुल ने लोकसभा चुनाव के दौरान पेश किए थे।












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