ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एमएसडीई और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने किया ऐतिहासिक समझौता

कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने, ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन।

ग्रामीण भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आजीविका के सशक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

Empowering Women Entrepreneurs in Rural India

यह समझौता नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में हुआ, जिसमें केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, और ग्रामीण विकास व संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी मौजूद रहे।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य SHG की महिलाओं को "लखपति दीदी" बनाना है — यानी वे महिलाएं जो सालाना ₹1 लाख या उससे अधिक की आय अर्जित कर सकें। इसके तहत मांग आधारित कौशल प्रशिक्षण, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, बाजार से जुड़ाव, और कौशल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) के माध्यम से प्रमाणन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रशिक्षण को देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs), जन शिक्षण संस्थान (JSS), ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs) और NIESBUD जैसी संस्थाओं के माध्यम से जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा व्यवसाय विकास, कानूनी जानकारी और मेंटरशिप पर भी जोर रहेगा। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) और जिला कौशल समिति (DSC) के बीच बेहतर समन्वय के ज़रिए, प्रशिक्षण को जिला कौशल विकास योजनाओं में समाहित किया जाएगा।

विकसित भारत @2047 के सपने को साकार करती साझेदारी

इस अवसर पर श्री जयंत चौधरी ने कहा: "यह साझेदारी केवल आर्थिक सशक्तिकरण नहीं बल्कि महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में लाने की दिशा में एक ठोस कदम है।"

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा: "1.48 लाख से अधिक लखपति दीदियों ने पहले ही मिसाल कायम की है। हमारा लक्ष्य है कि और अधिक दीदियों को भविष्य उन्मुख कौशल देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जाए।"

कार्यान्वयन और निगरानी

यह समझौता तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक संयुक्त समीक्षा समिति बनाई जाएगी, जो हर तिमाही प्रगति की समीक्षा करेगी। MoRD लाभार्थियों की पहचान, पाठ्यक्रम सहयोग और राज्य-स्तरीय समन्वय का कार्य करेगा, जबकि MSDE प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी व्यवस्था को देखेगा।

आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर

यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण, ‘वोकल फॉर लोकल’, आत्मनिर्भर भारत और नारी सशक्तिकरण जैसे राष्ट्रीय अभियानों के अनुरूप है। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय और ग्रामीण विकास विभाग की नई वेबसाइटों का भी शुभारंभ किया गया, जो डिजिटल समावेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐतिहासिक साझेदारी न केवल ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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