वो कौन से वादे हैं जो अरविंद केजरीवाल की सरकार ने पूरे नहीं किए

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। दिल्ली में 8 फरवरी को 70 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे और 11 फरवरी को चुनाव नतीजों का ऐलान होगा। सभी पार्टियां जीत के लिए पूरी कोशिश करती दिखाई देंगी। इस बीच अरविंद केजरीवाल की सरकार को थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। एक ओर दिल्ली सरकार का कहना है कि उसने अपने सभी वादे पूरे किए हैं और वह अपने काम के दम पर ही एक बार फिर जीत हासिल करेगी।

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    वहीं विपक्षी पार्टी भाजपा दिल्ली पर सत्ता काबिज करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह तो कई मौकों पर दिल्ली सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार ने बहुत से वादों को पूरा नहीं किया है। जबकि दिल्ली सरकार उनकी बात के जवाब में यही कहती है वो सभी वादे पूरे कर चुकी है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर वो कौन से वादे हैं जो दिल्ली सरकार पूरे नहीं कर पाई है।

    - दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा:

    दिल्ली सरकार ने जब भी चुनाव हुए तभी केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात कही। लेकिन ये वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

    - प्रदूषण:

    AAP ने कहा था कि प्रदूषण कम करने के लिए CNG और बिजली जैसे कम उत्सर्जन वाले ईंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। हालांकि, प्रदूषण में लगातार वृद्धि हुई है। कई अध्ययन बताते हैं कि दो बार पेश की गई ऑड-ईवन योजना से वाहनों के उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।

    साथ ही इस योजना से सार्वजनिक वाहनों में लोगों की संख्या काफी बढ़ी लेकिन ऐसे वाहनों की संख्या कम ही रही। दिल्ली सरकार ने कहा था कि वह कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करेगी और इलेक्ट्रिक वाहनों पर अपनी नीति लेकर आएगी। इस संबंध में नवंबर 2018 से काम चल रहा है।

    - सामाजिक कल्याण:

    अरविंद केजरीवाल सरकार ने बुजुर्गों और छात्रों को मुफ्त में सार्वजनिक वाहनों की यात्रा सुविधा देने की बात कही थी। हालांकि ये सुविधा केवल महिलाओं को ही मिल पाई। इसके साथ ही 2018 में एम्स की स्टडी में पता चला कि दिल्ली के एक तिहाई सड़क पर रहने वाले बच्चे शराब और ड्रग्स के आदी हैं।

    - रोजगार:

    सरकार ने अपने घोषणापत्र में 8 लाख नौकरियों का वादा किया था। लेकिन सरकार इसपर चुप रही। यह दावा करते हुए कि दिल्ली सरकार में 2 लाख नौकरियों की वैकेंसी है, केजरीवाल ने वादा किया कि सभी कॉनट्रैक्ट पर काम करने वालों को नियमित किया जाएगा। AAP का दावा है कि यह फाइल केंद्र को भेज दी गई थी, जिसने इसे कभी मंजूरी नहीं दी।

    - पानी:

    सभी तक पाइप के माध्यम से पानी की सुविधा नहीं पहुंची। करीब 650 झुग्गी-बस्तियों और अन्य 100 अनधिकृत कॉलोनियों में कनेक्शन नहीं हैं। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि वह मार्च 2019 तक केवल सात झुग्गी-बस्ती को ही पानी उपलब्ध कराने में सक्षम रहा है।

    कई कालोनियों के निवासी दिल्ली जल बोर्ड और निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। अपंजीकृत पानी के टैंकरों की संख्या भी दिल्ली में बढ़ गई है, और वे कहां से पानी लाते हैं और इसे कौन प्रदान करता है इसका कोई नियमन नहीं है।

    - किसान:

    जुलाई 2018 में दिल्ली में किसानों की आय को "तीन गुना" करने के लिए, AAP सरकार ने किसानों को प्रति वर्ष 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्रदान करने के लिए फार्म सोलर पावर योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत, किसान अपनी जमीन का एक-तिहाई हिस्सा निजी कंपनियों को सालाना 1 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रदान कर सकेंगे। सरकार ने कहा था कि प्रत्येक वर्ष किराए में 6 फीसदी वृद्धि होगी। लेकिन योजना लगभग अंधेरे में पड़ी है।

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