पेगासस की मदद से भारत में 300 फोन किए गए हैक, कई मंत्री, नेता, जज, पत्रकारों के नाम शामिल: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 19 जुलाई। आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और मानसून सत्र के ठीक पहले पेगासस की जो कथित रिपोर्ट सामने आई है वह सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। दुनिया के 17 मीडिया संस्थानों की कंसोर्टियम की ओर से दावा किया गया है कि दुनियाभर की सरकारें अपने देश के पत्रकारों, एक्टिविस्ट और नेताओं के फोन टैप करा रही हैं। इसमे भारत का नाम भी शामिल है। ग्लोबल कोलैब्रेटिव इंन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पेगासस स्पाइवेयर ने तकरीबन 300 मोबाइल नंबर को भारत में निशाना बनाया, जिसमे भारत में मोदी सरकार के दो मंत्री भी शामिल हैं। इस लिस्ट में तीन विपक्ष के नेता और संवैधानिक पद पर बैठे अहम व्यक्ति व कई पत्रकारों और व्यापारियों के नाम भी शामिल हैं।

phone tapping

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      ग्लोबल खोजी पत्रकारों का दावा
      ग्लोबल खोजी पत्रकारों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनियाभर के 50 हजार लोगों के फोन टैप किए गए हैं, यह लिस्ट 16 मीडिया हाउस के साथ शेयर की गई, जिसमे भारत का डिजिटल प्लेटफॉर्म द वायर भी शामिल है। भारत में इस लिस्ट में पत्रकार, मंत्री, विपक्ष के नेता, वैज्ञानिक, मानवाधिकार एक्टिविस्ट भी शामिल हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 300 लोगों के नंबर की भारत ने पहचान की थी और संभवत: इन लोगों के फोन पेगासस के जरिए हैक किए गए हो।

      दिग्विजय सिंह ने सरकार को घेरा
      ग्लोबल मीडिया के इस दावे के बाद भारत में इसको लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस खुलासे को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा, यदि वे सही थे तो अब कृपया यह बताएँ यह कौन कर रहा है। क्या गृह मंत्रालय से मंज़ूरी ली गई? आरोप तो यहॉं तक है कि सरकार ने अपने ही मंत्रियों व उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की जासूसी करने के लिए "पेगासस" का उपयोग किया। क्या उच्चतम न्यायालय इस विषय को संज्ञान में लेगा?

      भारत सरकार का जवाब
      वहीं इस मीडिया रिपोर्ट पर भारत सरकार की ओर से भी आधिकारिक बयान सामने आया है। भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों के फोन टैपिंग का दावा किया जा रहा है उसका कोई आधार नहीं है और इसका सच से वास्ता नहीं है। पहले भी इस तरह के दावे किए जा चुके हैं। उन दावों का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था, उसे हर पक्ष की ओर से सिरे से खारिज किया गया था। यहां तक कि खुद व्हाट्सएप ने भी उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। लिहाजा फोन टैपिंग की यह मीडिया रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने की एक कोशिश है।

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