लोकसभा चुनाव 2019: यवतमाल - वाशिम लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद शिवसेना की भावना गवली हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के प्रत्याशी शिवाजी राव मोघे से 938,16 वोटों से हराकर अपने नाम की थी। गवली को 477, 905 वोट मिले थे तो वहीं मोघे को 384,089 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। यवतमाल जिले में 69 प्रतिशत लेग हिंदू धर्म में, 14 प्रतिशत इस्लाम धर्म में और 12 प्रतिशत लोग बौंद्ध धर्म में भरोसा करते हैं। आपको बता दें कि साल 2014 का लोकसभा चुनाव शिवसेना और भाजपा ने मिलकर लड़ा था।

यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट का इतिहास
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित यवतमाल जिला अमरावती मंडल के अंतर्गत आता है। ये महाराष्ट्र के कपास उत्पादन का बहुत बड़ा केंद्र है। यह आदिवासी बहुल जिला है। यहां की कुल आबादी 23,95,147 है, जिसमें से 74 प्रतिशत लोग गांवों में और 25 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें हैं, परिसीमन के बाद यवतमाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र तीन हिस्सों में बंट गया जिसमें एक हिस्सा वाशिम जिले से जुड़ा, दूसरा चंद्रपुर जिले से तो तीसरा मराठवाड़ा के हिंगोली जिले में शामिल हुआ। जिसके बाद साल 2009 में यहां चुनाव हुए जिसमें शिवसेना की भावना गवली को विजय मिली और वो लगातार दो बार से इस सीट पर निर्वाचित हुई हैं। वैसे परिसीमन से पहले भी वो शिवसेना के टिकट पर वाशिम सीट से ही जीतकर लोकसभा पहुंची थीं।
भावना गवली का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसबंर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक भावना गवली की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 76 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 32 डिबेट में हिस्सा लिया है और 307 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 बसपा और नंबर 4 पर MNS थी। उस साल यहां कुल मतदाताओं की संख्या 17 लाख 43 हजार 498 थी, जिसमें से मात्र 10 लाख 32 हजार 949 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें से पुरुषों की संख्या 5 लाख 85 हजार 785 और महिलाओं की संख्या 4 लाख 47 हजार 164 थी।
यवतमाल जिले की जनता ने इस निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का मौका सबसे ज्यादा कांग्रेस के ही नेताओं को दिया लेकिन आज लंबे वक्त से कांग्रेस यहां जीत के लिए तरस रही है। दो बार वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रह चुकी गवली ने परिसीमन के बाद वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से यवतमाल जुड़ जाने के बावजूद जीत हासिल की। जिसका मतलब साफ है कि इस सीट पर शिवसेना का ही राज है और कांग्रेस या दूसरी पार्टियां तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक यहां के लोगों का दिल जीतने में नाकाम रही हैं। शिवसेना का गढ़ बन गई इस सीट पर उसे हराना आसान काम नहीं है, देखते हैं कांग्रेस और विरोधी पार्टियां इस बार शिवसेना के दुर्ग को भेदने के लिए क्या रणनीति अपनाती है और क्या यहां की जनता उनकी रणनीति को स्वीकारेगी , ये एक बड़ा सवाल है, वैसे यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि पिछले चुनाव में गवली और मोधे के बीच मात्र 9 प्रतिशत वोटों का अंतर था, जिसकी वजह से कांग्रेस और उनसे सहयोगियों की पूरी कोशिश इस हार के अंतर को जीत में बदलने की होगी, देखते हैं वो इसमें कामयाब हो पाते हैं या नहीं, कुल मिलाकर इस बार यहां मुकाबला जबरदस्त होगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है, वैसे शह-मात के इस खेल में जीतेगा वही जिसके नाम पर यवतमाल-वाशिम की जनता मुहर लगाएगी।












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