लोकसभा चुनाव 2019: सिरसा लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: हरियाणा की सिरसा लोकसभा सीट से सांसद आईएनएलडी के चरणजीत सिंह रोरी है। इसकी आसपास की सीटों पर तो भारतीय जनता पार्टी अपना झंडा फहराने में कामयाब रही, लेकिन यह सीट आज तक उसके हाथ नहीं आयी। साल 2014 के चुनाव में आईएनएलडी के प्रत्‍याशी चरणजीत सिंह रोरी का वोट प्रतिशत जहां 39 प्रतिशत था, वहीं कांग्रेस के अशोक तनवर का वोट प्रतिशत 30.5 पर सिमट गया। कांग्रेस का पांच फीसदी वोट आईएनएलडी के खाते में चला गया और इसी के चलते चरणजीत सिंह रोरी यहां से सांसद बने। वहीं भाजपा ने एनडीए की सहयोगी पार्टी कुलदीप बिश्‍नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) पार्टी के लिये यह सीट छोड़ दी थी, लेकिन उनका वोट प्रतिशत मात्र 18 फीसदी तक सीमित रह गया। हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) एनडीए से अलग होकर यूपीए में चली गई।

profile of Sirsa lok sabha constituency

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सिरसा में मतदान 77 फीसदी रहा। इस सीट पर कुल 2 1,660,557 वोटरों में से 1,279,105 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। मत का प्रयोग करने वालों में 886,303 पुरुष एवं 774,254 महिलाएं थीं। 2011 के सेंसस के अनुसार सिरसा लोकसभा सीट की कुल आबादी 2,532,072 है, जिसमें 77.85% ग्रामीण जनसंख्‍या है, ज‍बकि 22.15% लोग शहरों में रहते हैं। यहां के अधिकांश वोटर किसान हैं।साल 1991 से लेकर 1998 तक यहां कांग्रेस ने लगातार दो बार जीत दर्ज की। वहीं 1998 से 2004 तक आईएनएलडी के सुशील कुमार इंदोरा यहां से सांसद रहे। 2004 में यह सीट वापस कांग्रेस के पाले में आ गई और आत्‍मा सिंह गिल और डा. अशोक तनवर यहां से सांसद रहे। 16वीं लोकसभा के चुनाव में डा. तनवर सीट बचाने में नाकामयाब रहे और आईएनएलडी ने फिर यहां अपना झंडा फहरा दिया।

चरणजीत सिंह रोरी का लोकसभा में प्रदर्शन

अब अगर मौजूदा सांसद के प्रदर्शन की बात करें तो 49 साल के चरणजीत सिंह रोरी का यह पहला टर्म है। चरणजीत सिंह रोरी ने मेट्रिक तक शिक्षा ली है। रोरी साहब ने मई 2014 से लेकर दिसम्‍बर 2018 तक मात्र 9 डिबेट में हिस्‍सा लिया। जबकि इन्‍हीं के राज्‍य का औसत 58.5 है और राष्‍ट्रीय औसत 63.8 है। हालांकि वो सदन में एक भी प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाये। चरणजीत सिंह रोरी ने लोकसभा में 79 प्रश्‍न पूछे, जबकि हरियाणा के साथी सांसदों का औसत 250 का रहा। राष्‍ट्रीय औसत 273 प्रश्‍नों का रहा। सांसद निधि की बात करे तो उन्होंने चार सालों में इन्‍होंने अपनी सांसद निधि का भरपूर इस्‍तेमाल किया। दिसम्‍बर तक इनके 4.96 करोड़ की धनराशि बची रही।

हालांकि इस समय वोट शेयर के मामले में आईएनएलडी पूरी तरह सेफ नहीं है। जाहिर है हरियाणा जनहित कांग्रेस या कांग्रेस में से कोई एक सिरसा सीट पर अपना उम्‍मीदवार मैदान में उतारेगी। यानी कुछ हद तक दोनों का वोट शेयर मिलकर आईएनएलडी के लिये भारी पड़ सकता है। यानी अब 2019 में रोरी की जीत उनके काम पर ही निर्भर करेगी। और तो और कांग्रेस और आईएनएलडी को बार-बार चांस देने वाली जनता का अगर मूड बदल गया, तो भाजपा या आम आदमी पार्टी के लिये भी यहां द्वार खुल सकते हैं।

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