लोकसभा चुनाव 2019: सिंहभूम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: झारखंड की सिंघभूम लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण गिलुवा हैं। साल 2014 में भाजपा के लक्ष्मण गिलुवा ने जनतांत्रिक बहुजन समाज पार्टी की गीता कोरा को 87524 के भारी मतों से हराया। साल 2014 में इस सीट पर 11,52,570 वोटर थे। इसमें 5,83,444 पुरुष और 5,69,126 महिला मतदाता थे। 2014 के आम चुनाव में 69 प्रतिशत फीसदी
वोटिंग हुई। इस चुनाव में 7,95,286 लोगों ने ही वोट दिया, जिसमें 4,03,528 पुरुष और 3,91,758 महिलाएं थी। डेमोग्राफिक डाटा पर ध्यान दे तो पाएंगे की इस जिले की कुल जनसख्या 18,96,730 है जिसमे 77.74% ग्रामीण और 22.26% शहरी जनता है। इन संख्याओं में 4.06% अनुसूचित जाति और 58.72% अनुसूचित जनजाति के लोग हैं।

profile of Singhbhum lok sabha constituency

ब्रिटिश राज में सिंघभूम जिला बंगाल प्रेसीडेंसी के छोटा नागपुर इलाके में आता था। वर्तमान में यह जिला झारखण्ड प्रदेश का एक अहम हिस्सा है। सिंघभूम नाम का अर्थ है सिंह की भूमि और वास्तव में इस इलाके का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा घना जंगली और पहाड़ी इलाका है जहाँ पर जंगली जानवर खुले घूमते हैं। हालाँकि इन जंगलों में अब शेर नहीं पाए जाते। आज की तारीख़ में सिंघभूम मुख्यतः तीन हिस्सों में विभाजित है - पूर्वी सिंघभूम, पश्चिमी सिंघभूम और सराइकेला खरसावाँ पर यह तीनों ही झारखण्ड राज्य का ही हिस्सा हैं। प्राकृतिक सम्पदा में धनी इस इलाके में लोहे और सम्बन्धित खनिजों की खदाने बहुतायत में पायी जाती हैं।

सिंघभूम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र झारखण्ड के मुख्य 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक हैं। यह सीट प्रमुख तौर पर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं - सरैकेल्ला , चैबासा, मझगाओं, जगनाथपुर,मनोहरपुर और चक्रधरपुर। इनमें से केवल सराइकेला विधानसभा सीट सरईकेला जिले का हिस्सा है बाकी पांचो विधान सभा सीटें पश्चिमी सिंघभूम का भाग हैं| 1996 से ही इस इलाके में वर्चस्व की लडाई दोनों सत्ता प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच रही है। पश्चिमी सिंघभूम देश के लाल गलियारे का एक प्रमुख हिस्सा है। इस जिले का मुख्यालय चैबासा में है।

लक्ष्मण गिलुवा का लोकसभा में प्रदर्शन

लक्ष्मण गिलुवा के पिछले पांच सालों में सांसद के तौर पर प्रदर्शन पर नजर डाली जाए तो संसद में इनकी उपस्थिति का औसत 93 प्रतिशत है जबकि राज्य उपस्थिति का औसत 86 प्रतिशत ही है। इनके कार्यकाल के दौरान पूछे गए प्रश्नों का औसत देखें तो इन्होने व्यक्तिगत रूप से 474 प्रश्न पूछे जो की राष्ट्रीय औसत 273 और राज्य औसत 406 से कहीं बेहतर है। बात करें डिबेट्स में भाग लेने की तो इन्होने अपने कार्यकाल में 28 डिबेट्स में हिस्सा लिया जबकि राज्य औसत 81.4 और राष्ट्रीय औसत 63.8 है। हालांकि राज्य औसत 5.9 और राष्ट्रिय औसत 2 के विपरीत इन्होंने संसद में कोई भी प्राइवेट मेम्बर बिल नहीं प्रस्तुत किया है।

चुनावी पिच पर स्ट्राइक रेट देखें तो 50 50 प्रतिशत भाजपा और कांग्रेस में बंटा हुआ है। अब 2019 में देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किसे चुनती है।

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