लोकसभा चुनाव 2019: नवसारी लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: गुजरात की नवसारी लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के चंद्रकांत रघुनाथ पाटील हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस नेता मकसूद मिर्जा को 558, 116 वोटों से हराया था। चंद्रकांत रघुनाथ पाटील को यहां पर 8,20,831 वोट हासिल हुए थे तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी मिर्जा को मात्र 2,62,715 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। उस साल इस सीट पर नंबर तीन पर आप और नंबर चार पर बसपा थी, आप प्रत्याशी मेहूल पटेल को यहां पर 14,299 वोट और बसपा प्रत्याशी केशवभाई चौहान को 11,240 वोट हासिल हुए थे।

नवसारी लोकसभा सीट का इतिहास
नवसारी संसदीय सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस संसदीय सीट के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं। अस्तित्व में आने के बाद साल 2009 के पहले आम चुनाव में बीजेपी के चंद्रकांत रघुनाथ पाटील यहां से सांसद बने और साल 2014 का चुनाव भी उन्होंने ही यहां पर जीता और वो लगातार दूसरी बार यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे।
चंद्रकांत रघुनाथ पाटील का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में चंद्रकांत रघुनाथ पाटील की उपस्थिति 90 प्रतिशत रही है और इस दौरान इन्होंने मात्र 6 डिबेट में हिस्सा लिया है और 292 प्रश्न पूछे हैं। हाल ही में पाटील 'हर घर तिरंगा, हर गांव तिरंगा' अभियान की वजह से काफी सुर्खियों में रहे थे।
नवसारी, एक परिचय-प्रमुख बातें-
गुजरात के खास जिलों में से एक नवसारी में कपास, पीतल, तांबे के बर्तन बनाने का सामान और इमारती लकड़ी का व्यापार होता है। आजादी के पहले नवसारी ओल्ड वडोदरा स्टेट का सबसे अहम शहर था। 1 मई, 1949 को इसे सूरत जिले में मिला दिया गया था, फिर जून 1964 में सूरत जिले का पुनर्गठन हुआ और नवसारी वलसाड जिले का हिस्सा बन गया, फिर 2 अक्टूबर, 1997 को ये अलग जिला बना, इतिहास कहता है कि 7वीं सदी में इसको नवसारिका कहते थे। पारसियों ने भारत में सबसे पहले यहीं कदम रखा था इसलिए इसे पारसीपुरी भी कहा जाता था, ग्रीक स्रोतों में भी इसका जिक्र मिलता है, भारत के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक मशहूर बंदरगाह के रूप में. नवसारी मशहूर रहा है इसकी कुल आबादी 31,99,734 है, जिसमें से 18.83% लोग गांवों में और 81.17% लोग शहरों में निवास करते हैं, यहां 2 प्रतिशत लोग एससी वर्ग के और 12 प्रतिशत लोग एसटी वर्ग के हैं। नवसारी में 92 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म में और 5 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में यकीन रखते हैं।
नवसारी सीट पर भाजपा को हराना आसान नहीं है, अब तक हुए दोनों ही लोकसभा चुनावों में यहां कांग्रेस प्रत्याशियों को भारी अंतर से हारना पड़ा है, ऐसे में क्या एक बार फिर से यहां पर बीजेपी का डंका बजेगा या फिर कांग्रेस का सूखा समाप्त होगा, यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब चुनावी नतीजे ही हमें देंगे, कांग्रेस जहां इस वक्त हाल के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में हुई जीत की वजह से आत्मविश्वास से भरी हुई है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के ऊपर दवाब सीटों पर अपने वर्चस्व को बचाकर रखने का है , लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि शह और मात के इस खेल में जीत की बाजी उसी के हाथ लगेगी जिसे यहां की जनता चुनेगी, देखते हैं इस बार जनता नवसारी की सत्ता किसके हाथ में सौंपती है, फिलहाल इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस बार इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प होगा।












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