लोकसभा चुनाव 2019: मिजोरम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। मिजोरम लोकसभा सीट की बात करें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सी.एल. रुआला सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सी.एल. रुआला अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार रॉबर्ट रोमाविया रोयते को 6 हजार 154 वोटों से हराया। इस चुनाव में रुआला को कुल 2 लाख 10 हजार 485 वोट मिले थे, वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रॉबर्ट आर. रोयते को 2 लाख 4 हजार 331 मत मिले। तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एम. लालमन्जुआला रहे, जिन्हें 11 हजार 890 वोट मिले। 6 हजार 495 वोटरों ने नोटा का इस्तेमाल किया।

लोकसभा चुनाव 2019: मिजोरम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

मिजोरम राज्य की इस इकलौती लोकसभा सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 4 लाख 33 हजार 201 मतदाताओं ने हिस्सा लिया, यानी इस सीट पर करीब 62 फीसदी मतदान हुआ था। वोट डालने वालों में 2 लाख 16 हजार 167 पुरुष मतदाता थे, वहीं महिला वोटरों की संख्या पुरुष मतदाताओं से भी ज्यादा 2 लाख 17 हजार 034 थी। 2014 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले सीएल रुआला 82 साल के हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन कर रखी है। रुआला की लोकसभा में उपस्थिति करीब 90 फीसदी रही। हालांकि उन्होंने महज 4 बार ही लोकसभा में सवाल पूछा और सिर्फ दो बार बहस में ही शामिल हुए। रुआला लगातार दूसरी बार इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उस समय उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. एच. लल्लूंगमुआना को करीब 1 लाख 8 हजार 955 वोटों से करारी शिकस्त दी थी। इस लोकसभा चुनाव में रुआला को 2 लाख 13 हजार 779 वोट मिले थे, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार लल्लूंगमुआना 1 लाख 4 हजार 824 वोट मिले थे। आंकड़े देखें तो 1977 से अब तक हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 6 बार जीत दर्ज की थी, वहीं 4 बार निर्दलीय उम्मीदवार ने इस सीट पर जीत हासिल की। मिजोरम की राजनीति में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) भी प्रमुख राजनीतिक दल है। जिसके मुखिया जोरमथांगा हैं।

मिज़ोरम भारत का एक उत्तर पूर्वी राज्य है। ये एक पर्वतीय प्रदेश है। फरवरी, 1987 में ये देश का 23वां राज्य बना। 1972 में केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले तक यह असम का एक जिला था। मिजोरम संसदीय सीट, अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित है। मिजोरम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल 40 विधानसभा क्षेत्र हैं। यहां कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7 लाख, 02 हजार 170 है। इनमें 3 लाख 46 हजार 219 पुरुष मतदाता हैं, वहीं 3 लाख 55 हजार 951 महिला वोटर हैं। मिजोरम को 1987 में नए राज्य के तौर मान्यता मिली थी और आइजॉल को इसकी राजधानी बनाई गई थी। यहां कई जनजातियां निवास करती हैं जो कि अपनी संस्कृति या भाषा के जरिए एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं, इन्हें सामूहिक रूप से मिजो'स कहा जाता है। इस क्षेत्र में 85% से अधिक आबादी इसाई धर्म को मानती है। मिजोरम की साक्षरता दर 91.33 फीसदी है, जो भारत में केरल के बाद दूसरे नंबर पर है, यहां स्वच्छता का स्तर 93 फीसदी से ऊपर है, जिसे बेहद अच्छा माना जा सकता है। मिजोरम में प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है। यहां प्रकृति की अलग-अलग छटाएं देखने को मिलती हैं। मिजोरम विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त कई जाने-माने कॉलेज और स्कूल यहां स्थित हैं। ये राज्य मुख्य रूप से कृषि केंद्रित है, जहां करीब 70 फीसदी आबादी इसी पर निर्भर करती है। संचार और संसाधनों के अभाव की वजह से मिजोरम अन्य उद्योगों के मामले में आगे नहीं बढ़ पाया है।

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