लोकसभा चुनाव 2019: खंडवा लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की खंडवा लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार अरूण यादव को 25, 97, 14 वोटों से हराया था। साल 2014 के चुनाव में यहां नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर आप थी, उस साल यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 17 लाख 59 हजार 410 थी , जिनमें से मात्र 12 लाख 57 हजार 327 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था जिनमें पुरुषों की संख्या 6 लाख 77 हजार 574 और महिलाओं की संख्या 5 लाख 79 हजार 753 थी।

profile of Khandwa lok sabha constituency

खंडवा लोकसभा सीट का इतिहास

खंडवा संसदीय क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें आती हैं। साल 1952 में यहां पहला आम चुनाव हुआ था, जिसे कि कांग्रेस ने जीता था, तब से लेकर 1971 तक यहां कांग्रेस का ही राज रहा लेकिन 1977 के चुनाव में यहां पर भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की लेकिन इसके बाद 1980 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और उसका राज 1984 तक रहा। साल 1989 में पहली बार यहां भाजपा जीती लेकिन 1991 के चुनाव में एक बार फिर से यहां कांग्रेस को सफलता मिली लेकिन साल 1996 के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से अपनी हार का बदला ले लिया और नंद कुमार सिंह चौहान यहां से सांसद बने, वो लगातार चार बार इस सीट पर सांसद रहे लेकिन साल 2009 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और अरूण यादव यहां से एमपी चुने गए लेकिन साल 2014 के चुनाव में नंद कुमार सिंह ने कांग्रेस से अपनी हार का बदला ले लिया और वो पांचवी बार इस सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे।

नंदकुमार सिंह का लोकसभा में प्रदर्शन

नंदकुमार सिंह चौहान ने चौदहवीं लोकसभा में खंडवा सीट और अरूण यादव ने पड़ोसी खरगोन सीट का प्रतिनिधित्व किया था। परिसीमन के बाद खरगोन सीट के आरक्षित होने की वजह से अरूण यादव ने खंडवा की तरफ वापस रूख किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। भाजपा की जानी मानी हस्तियों में शामिल नंदकुमार सिंह चौहान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और खंडवा के लोगों में वो 'नंदू भईया ' के नाम से लोकप्रिय हैं। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी लोकसभा में उपस्थिति 53 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने मात्र 7 डिबेट में हिस्सा लिया है और 6 प्रश्न पूछे हैं।

खंडवा, परिचय-प्रमुख बातें

मशहूर गायक किशोर कुमार की जन्मस्थली खंडवा कई मायनों में काफी अहम है, भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में शामिल ओमकारेश्‍वर बाबा का मंदिर यहीं है, प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खंडवा शहर का प्राचीन नाम खांडव-वन था, जो कि बाद में खंडवा हो गया तो वहीं मान्यतानुसार भगवान राम के वनवास के समय यहां मां सीता को प्यास लगी थी तब राम ने यहां तीर मारकर एक कुआं बनाया था, जिसे कि रामेश्वर कुएं के नाम से जाना जाता है और भूमि का खंड होने के कारण इसका नाम खंडवा पड़ गया, यहां की आबादी 27,28,882 है, जिसमें से 76 प्रतिशत लोग गांवों में और 23 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

खंडवा सीट पर अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला देखने को मिला है फिलहाल यहां पर भाजपा का कब्जा है लेकिन इस बार सियासी हालात बदले हुए हैं क्योंकि राज्य की सत्ता से भाजपा आउट हो चुकी है, ऐसे में इस सीट पर भाजपा की वापसी काफी चुनौतीपूर्ण हैं तो वहीं आत्मविश्वास से भरी हुई कांग्रेस की पूरी कोशिश इस बार अपनी हार को जीत में बदलने की होगी, देखते हैं शह और मात के इस खेल में जीत की बाजी किसके हाथ लगती है।

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