लोकसभा चुनाव 2019: करौली-धौलपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: राजस्थान की करौली-धौलपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के डॉ. मनोज राजोरिया हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लख्खीराम लाल को हराया था। मनोज राजोरिया को जहां 40,24,07 वोट मिले वहीं कांग्रेस के लख्खीराम लाल को 37,51,91 वोट मिले थे। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर बसपा थी। राजस्थान की करौली-धौलपुर संसदीय सीट साल 2008 के नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस संसदीय सीट के अंतर्गत विधानसभा की आठ सीटें आती हैं। अस्तित्व में आने के बाद हुए 2009 के पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस के खिलाड़ी लाल बैरवा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां भाजपा का कब्जा हो गया।

डॉ. मनोज राजोरिया का लोकसभा में प्रदर्शन
डॉ. मनोज राजोरिया राजनीति में आने से पहले वो चिकित्सा क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे थे। दिसबंर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान उनकी लोकसभा में उपस्थिति 92 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने 278 डिबेट में हिस्सा लिया है और 478 प्रश्न पूछे हैं। आपको बता दें कि ये लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
करौली-धौलपुर लोकसभा सीट, परिचय-प्रमुख बातें-
राजस्थान के करौली जिले का गठन 19 जुलाई, 1997 को राज्य के 32 वें जिले के रूप में हुआ था। सांस्कृतिक दृष्टि से भी करौली जिले में अनेक विभिन्नताएं पाई जाती हैं। करौली जिले में सम्पूर्ण रूप बृज संस्कृति का प्रभाव देखने का मिलता है। यहां के मेले, त्योहार सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक रहे हैं, यहां पाए जाने वाले सिलिका स्टोन से वाहनों के शीशे बनाने का कार्य वृहद रूप से होता है। यहां की जनसंख्या 26 लाख 69 हजार 297 है, जिसमें से 82 प्रतिशत लोग गांवों में और 17 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं। करौली को अलग जिला बनाने के लिए यहां के लोगों ने बहुत संघर्ष किया है, स्वर्गीय विधायक बाबा हंसराम गुर्जर, एडवोकेट अब्दुल रहीम और दिवंगत एडवोकेट जगदीश पॉल का नाम जिला गठन के लिए लड़ी गई लड़ाई में सबसे पहले आता है।
उस साल यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 15 लाख 49 हजार 662 थी, जिसमें से मात्र 8 लाख 45 हजार 941 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 91 हजार 661 और महिलाओं की संख्या 3 लाख 54 हजार 280 थी। यहां 20 फीसदी एससी आबादी है, जबकि 16 फीसदी आबादी एसटी है, जो कि किसी भी पार्टी के उम्मीदवार को विजयी बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और इन्हीं को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस और बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नाम तय करते हैं।
मोदी लहर के बीच डॉ. मनोज राजोरिया को यहां बंपर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस अपनी गलतियों की वजह से यहां हारी थी लेकिन इस वक्त राज्य के सियासी हालात बदले हुए हैं, राजस्थान की जनता ने बीजेपी को राज्य की सत्ता से आउट कर दिया है तो वहीं सूबे में कांग्रेस की हुकूमत है, ऐसे में क्या यहां की जनता एक बार फिर से बीजेपी को यहा मौका देगी, यह एक बड़ा प्रश्न है तो वहीं कांग्रेस भी इस सीट को पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेगी, इसमें कोई भी संदेह नहीं लेकिन शह और मात के इस खेल में जीतगा वो ही जिसे की जनता का प्यार और साथ मिलेगा और जनता के दिल में क्या है, यह तो हमें चुनावी नतीजे बताएंगे।












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