लोकसभा चुनाव 2019: इटावा लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की इटावा लोकसभा सीट से भाजपा के अशोक कुमार दोहरे सांसद हैं। साल 2014 में ये सीट भाजपा ने सपा को 172946 मतों से हराकर अपने नाम की थी। इस चुनाव में नंबर 2 पर सपा, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर कांग्रेस थी।

इटावा में पांच विधानसभा सीटें-
इटावा संसदीय सीट के अंतर्गत कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं, इटावा, भरथना, दिबियापुर, औरैया और सिकन्दरा। 1957 में हुए चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के अर्जुन सिंह भदौरिया यहां के पहले एमपी चुने गए थे, उस वक्त ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। लेकिन 1967 में यह सीट परिसीमन के बाद सामान्य हो गई। 1971 में यहां कांग्रेस का परचम लहराया और 1977 में अर्जुन सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर यहां जीत दर्ज की। 1996 तक अलग-अलग पार्टियों के प्रत्याशी यहां से जीतकर सांसद बने।
1998 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां खाता खोला और सुखदा मिश्र यहां की पहली महिला सांसद निर्वाचित हुई। 2009 में परिसीमन के बाद इटावा की सीट वापस से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई, परिसीमन के बाद हुए चुनावों में सपा के प्रेमदास कठेरिया ने जीत दर्ज की लेकिन साल 2014 में ये सीट भाजपा के पास आ गई और अशोक कुमार दोहरे यहां से चुनकर लोकसभा पहुंचे।
अशोक कुमार दोहरे
अशोक कुमार दोहरे सोलहवीं लोकसभा में श्रम संगठन के स्थाई समिति के सदस्य भी हैं। पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 82 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने मात्र 3 डिबेट में हिस्सा लिया।
इटावा लोकसभा सीट का इतिहास
इटावा पश्चिमी उत्तरप्रदेश के बड़े जिलों में से एक है
आबादी 15,75,247 और साक्षरता दर लगभग 82% है
इटावा शुद्ध देशी घी के वितरण का भी बड़ा केंद्र
कपास और रेशम बुनाई के महत्त्वपूर्ण उद्योग और तिलहन मिलें
साल 2014 के चुनाव में 1707237 मतदाताओं ने हिस्सा लिया
54 प्रतिशत पुरुष और 45 प्रतिशत महिलाओं ने की भागेदारी
इटावा की 92 प्रतिशत जनसंख्या हिंदुओं की और 7 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है
सपा-बसपा के गठबंधन के बाद इस सीट पर आगामी लोकसभा चुनाव दिलचस्प हो सकता है।












Click it and Unblock the Notifications