लोकसभा चुनाव 2019: अमेठी लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से सांसद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। साल 2014 में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को पराजित किया था। आम आदमी पार्टी (आप) के कुमार विश्वास भी यहां से चुनाव लड़े थे। जिनकी जमानत जब्त हो गई थी। समाजवादी पार्टी ने इस सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। यहां अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों और 2 उपचुनाव में कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है।

अमेठी में पांच विधानसभा क्षेत्र
अमेठी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत 4 तहसील और 5 विधान सभा क्षेत्र आते हैं,। इन 5 विधान सभा क्षेत्रों के नाम हैं, सलोन, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी हैं। जिसमें सलोन और जगदीशपुर अनुसूचित जाति के लिए अरक्षित है। देश में 1951-52 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे, तब अमेठी लोकसभा का कोई वजूद नहीं था तब ये इलाका सुल्तानपुर दक्षिण लोकसभा सीट में आता था। यहां से तब कांग्रेस के बालकृष्ण विश्वनाथ केशकर चुनाव जीते थे। इसके बाद 1957 में मुसाफिरखाना लोकसभा सीट अस्तित्व में आई, जो इस वक्त अमेठी जिले की एक तहसील है, तब कांग्रेस के बी वी केशकर यहां के सांसद बने थे। साल 1967 के आम चुनाव में अमेठी लोकसभा अस्तित्व में आई, नई सीट पर कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी को अमेठी का पहला सांसद बनने का गौरव मिला, वो 1971 में भी यहां से एमपी चुने गए। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने राजा रणंजय सिंह के बेटे संजय सिंह को प्रत्याशी बनाया लेकिन उस वक्त देश में जनता पार्टी लहर थी, संजय सिंह चुनाव हार गए और भारतीय लोकदल के रविन्द्र प्रताप सिंह सांसद चुने गए, तब पहली बार चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस हारी थी।
1980 के चुनाव से कांग्रेस ने सत्ता के साथ-साथ इस सीट पर भी वापसी की, इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने चुनाव लड़ा और वो यहां से लोकसभा पहुंचे थे। तब इस सीट पर पहली बार नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ा था। 23 जून 1980 को संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत हो जाने के बाद 1981 में यहां उपचुनाव हुआ था जिसमें इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी अमेठी से सांसद चुने गए।
राजीव इसके बाद लगातार 4 बार इस सीट से जीते और 10 सालों तक यहां के सांसद रहे। साल 1991 में उनकी हत्या के बाद यहां उपचुनाव हुए और कांग्रेस नेता सतीश शर्मा यहां से विजयी हुए वो लगातार दो बार यहां से एमपी रहे। 1998 में बीजेपी ने कांग्रेस से बीजेपी में आए अमेठी राजघराने के वारिस संजय सिंह को चुनाव लड़ाया, संजय सिंह चुनाव जीत गए और सतीश शर्मा चुनाव हार गए. ये दूसरा मौका था जब इस सीट पर कांग्रेस को हार मिली,
1999 में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी चुनाव मैदान में उतरीं और अमेठी की सांसद बनीं और संजय सिंह भारी मतों से यहां हारे। 2004 में अमेठी से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी पहली बार सांसद चुने गए। राहुल 3 लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीते, सपा ने तब समाजवादी पार्टी ने यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। 2009 और 2014 के चुनाव में भी राहुल गांधी यहां से एमपी चुने गए। वो लगातार तीन बार से इस सीट से सांसद हैं।
राहुल गांधी
राहुल गांधी वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पिछले साल उन्होंने अपनी मां सोनिया गांधी के बाद ये पद संभाला है।
अमेठी लोकसभा सीट, एक परिचय- प्रमुख बातें
अमेठी, फैजाबाद डिवीज़न के अंतर्गत आता है
विश्व प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर आस्था का केंद्र है
पुराने समय में अमेठी को रायपुर-अमेठी कहा जाता था
रायपुर वो जगह थी जहां अमेठी के राजा का किला था
यहां से 3 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध कवि मालिक मोहम्मद जायसी का मकबरा है
अमेठी जिले की कुल जनसंख्या करीब 1,500,000 है
यहां की औसत साक्षरता दर लगभग 60% है
अमेठी में लगभग 16 फीसदी यानि की करीब 3 लाख वोटर मुस्लिम समाज से
लोकसभा के आगामी चुनाव में राहुल गांधी की कोशिश इस सीट पर जीतने की होगी।












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