लोकसभा चुनाव 2014: अमलापुरम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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    Lok Sabha Election 2019: History of Amalapuram, MP Performance card | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। आज हम बात करेंगे आंध्र प्रदेश की अमलापुरम लोकसभा सीट के बारे में, जहां से इस वक्त तेलुगु देशम पार्टी के पांडुला रवींद्र बाबू सांसद हैं। जिन्होंने इस सीट से साल 2014 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार पीनिप विश्वरूपु को मात देते हुए जीत हासिल की थी। इस चुनाव रविंद्र बाबू को कुल 594,547 वोट मिले थे जबकि पीनिप विश्वरुपु को 473,971 वोट मिले थे। वहीं वोट प्रतिशत की बात करें तो टीडीपी के खाते में 53.04 फीसदी और वाइएसआर कांग्रेस के पक्ष में 42.28 वोट पड़े थे। इस चुनाव में तीसरे नंबर पर इंडियन नेशनल कांग्रेस थी। जिसको 12,182 वोट मिले थे। यह सीट एससी के लिए आरक्षित है। इस सीट के भौगोलिक स्थिति के बारे में बात करें तो यहां की अधिकतर जनसंख्या गांवों में निवास करती है। जिसमें अधिकतर वोटर किसान हैं।

    profile of Amalapuram lok sabha constituency

    अमलापुरम में कुल वोटरों की संख्या 13,57,866 है। जिसमें 6,82,607 पुरुष वोटर हैं जबकि 6,75,259 महिला वोटर हैं। इस सीट पर कुल जनसंख्या 18,72,795 है। जिसमें 91.22 फीसदी ग्रामीण और 8.78 फीसदी लोग शहरों में निवास करते हैं। 24.58 फीसदी अनुसूचित जाति के लोग हैं जबकि 0.78 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लोग यहां निवास करते हैं। इस सीट से टीडीपी ने 5 बार जीत हासिल की है जबकि 1980 के बाद कांग्रेस ने पांच बार जीत हासिल की है। मतलब जीत की तुलना में दोनों ही पार्टियां बराबरी पर हैं।

    सदन में 144 सवाल उठाए हैं

    इस सीट से मौजूदा सांसद पांडुला रवींद्र बाबू के बारे में आपको बता दें कि इन्होंने राजस्व विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और चुनाव मैदान में उतरे। इन्होंने सदन में अभी तक 144 सवाल उठाए हैं। जबकि सदन में इनकी उपस्थिति 96 फीसदी रही है। साथ में इन्होंने 66 चर्चाओं में हिस्सा लिया है। साल 2014 में हुए चुनाव में कुल 11,20,927 वोट पड़े थे। जो कि कुल वोटरों का 83 फीसदी है। इसमें 6,68,534 पुरुष वोटर थे जबकि 5,52,393 महिला वोटर शामिल हैं।

    इस सीट के पहले सांसद रहे कनाती मोहन राव

    इस सीट के इतिहास के बारे में आपको बता दें कि यहां पर पहली बार 1952 में चुनाव हुआ था जिसमें कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार कनाती मोहन राव ने सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1957 के चुनाव में भी कनाती मोहन सांसद चुने गए। लेकिन इसके बाद इस सीट पर भारतीय कांग्रेस पार्टी हावी हो गई और 1962 में कांग्रेस से उम्मीदवार बया सूर्यनारायण मूर्ति ने जीत हासिल की। मूर्ति लोकसभा का अगला दो चुनाव भी जीते।

    टीडीपी और कांग्रेस के बीच में रही कड़ी टक्कर

    उसके बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुसुमा कृष्ण मूर्ति को मैदान में उतारा और जीत भी हासिल की। कृष्ण मूर्ति इस सीट से दो बार सांसद रहे। इसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में टीडीपी के उम्मीदवार एजे वेंकट बुटी महेश्वरा राव ने जीत हासिल की। लेकिन अगले चुनाव में टीडीपी के हाथ से यह सीट चली गई कांग्रेस के हाथ में और कुसुमा कृष्ण मूर्ति ने जीत हासिल करते हुए तीसरी बार सांसद चुने गए।

    इस बार टीडीपी और कांग्रेस के बीच टक्कर की संभावना

    1991 में हुए लोकसभा चुनाव में टीडीपी ने गन्ती मोहनचंद्र बालयोगी को चुनाव मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने केआरएस मुर्ति को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की। बता दें कि इस बार के चुनाव में भी टक्कर दो ही पार्टियों टीडीपी और कांग्रेस के बीच में होने की संभावना है। लेकिन फिलहाल यह सीट टीडीपी के कब्जे वाली सीट है। अब देखना है कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए इस सीट से दोनों पार्टियां किस उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती हैं।

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