Bakrid 2026: 'कहीं सेवइयों की मिठास, कहीं बिरयानी की खुशबू', भारत में कैसे मनाई जाती है बकरीद?
Bakrid 2026: भारत विविधताओं का देश है, हर चार कोस पर यहां पर भाषा बदल जाती है लेकिन मिट्टी की खुशबू और त्योहारों की चमक में कोई फर्क नहीं आता है और यही हिंदुस्तान की खासियत भी है। ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है। आपको बता दें कि इस साल बकरीद का पर्व भारत में 28 मई 2026 को मनाया जाएगा।
यह त्योहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी और अल्लाह के प्रति समर्पण की याद में मनाया जाता है। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं, हालांकि बकरीद का मूल भाव पूरे देश में एक जैसा होता है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में इसे मनाने की अपनी खास परंपराएं और सांस्कृतिक रंग देखने को मिलते हैं।

उत्तर प्रदेश: बिरयानी-कबाब संग दिखता है नवाबी अंदाज
उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ में बकरीद का त्योहार बेहद खास माना जाता है। यहां लोग सुबह ईदगाह में नमाज पढ़ने के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं। घरों में बिरयानी, कबाब, शीर खुरमा और कोरमा जैसे लजीज पकवान बनाए जाते हैं। पुरानी लखनऊ की गलियां इस दिन रोशनी और रौनक से भर जाती हैं। कई परिवार जरूरतमंदों को खाना और कपड़े भी बांटते हैं।
दिल्ली: परंपरा और आधुनिकता का संगम
देश की राजधानी दिल्ली में जामा मस्जिद और आसपास के इलाकों में बकरीद की अलग ही रौनक दिखाई देती है। लोग नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हैं और फिर परिवार व दोस्तों के साथ दावत का आनंद लेते हैं। पुरानी दिल्ली के बाजारों में सेवइयां, मसाले और मिठाइयों की खूब खरीदारी होती है। यहां सामूहिक भाईचारे और मेलजोल की झलक साफ नजर आती है।
कश्मीर: सादगी और आध्यात्मिक माहौल
जम्मू-कश्मीर में बकरीद धार्मिक आस्था और सादगी के साथ मनाई जाती है। श्रीनगर की हजरतबल दरगाह में हजारों लोग नमाज के लिए जुटते हैं। यहां लोग खास कश्मीरी व्यंजन जैसे रोगन जोश, यखनी और गोश्ताबा बनाते हैं। त्योहार के दौरान लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद को भी विशेष महत्व देते हैं।
केरल: मलाबार शैली की बकरीद
केरल में बकरीद को "ईद-उल-अजहा" के नाम से अधिक जाना जाता है। यहां मुस्लिम समुदाय मस्जिदों में नमाज अदा करने के बाद परिवार के साथ पारंपरिक मलाबारी भोजन करता है। मालाबार बिरयानी, अलेसा और पथिरी जैसे व्यंजन इस दिन खास तौर पर बनाए जाते हैं। केरल में त्योहार के दौरान साफ-सफाई और सामाजिक सेवा पर भी जोर दिया जाता है।
पश्चिम बंगाल: संस्कृति और स्वाद का मेल
कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में बकरीद पर बाजारों की रौनक देखते ही बनती है। यहां लोग पारंपरिक बंगाली मुस्लिम व्यंजन जैसे चाप, बिरयानी और रेजाला तैयार करते हैं। कई जगहों पर सामूहिक भोज का आयोजन होता है, जहां लोग मिलकर त्योहार की खुशियां बांटते हैं।
हैदराबाद: निजामी स्वाद की धूम, हलीम संग खास होती है ईद
हैदराबाद की बकरीद अपने खास निजामी खाने के लिए प्रसिद्ध है। यहां हैदराबादी बिरयानी, हलीम, मरग और डबल का मीठा जैसे व्यंजन त्योहार की शान होते हैं। चारमीनार और आसपास के इलाकों में देर रात तक चहल-पहल रहती है। परिवार और रिश्तेदार एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद देते हैं।
महाराष्ट्र: भाईचारे का संदेश
मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में बकरीद बड़े उत्साह से मनाई जाती है। यहां मुस्लिम समुदाय के साथ अन्य धर्मों के लोग भी त्योहार की खुशियों में शामिल होते हैं। मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर खाने-पीने की खास रौनक दिखाई देती है। लोग जरूरतमंदों को भोजन और सहायता देकर इंसानियत का संदेश देते हैं।
बकरीद का असली संदेश
बकरीद केवल कुर्बानी का त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक भी है। यह पर्व सिखाता है कि जरूरतमंदों की मदद करना और समाज में प्रेम व एकता बनाए रखना सबसे बड़ा धर्म है। भारत में अलग-अलग परंपराओं और संस्कृति के बावजूद बकरीद लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करती है।














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