लोकसभा चुनाव 2019: अहमदाबाद ईस्ट लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: गुजरात की अहमदाबाद ईस्ट(पूर्व) लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद अभिनेता से नेता बने परेश रावल हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था। परेश रावल ने कांग्रेस प्रत्याशी हिम्मत सिंह पटेल को 326,333 वोटों के भारी अंतर से हराया था। परेश रावल को इस सीट पर 633,582 वोट मिले थे तो वहीं हिम्मत सिंह को 306,949 वोटों पर संतोष करना पड़ा था जबकि आप पार्टी के प्रत्याशी 113, 49 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।

अहमदाबाद पूर्व लोकसभा सीट का इतिहास
अहमदाबाद पूर्व सीट साल 2008 के नए परिसीमन के बाद सामने आई। इस वक्त अहमदाबाद पूरब सीट के अंतर्गत 7 विधानसभा सीट आती हैं, जिनके नाम हैं दहेगाम, गांधीनगर दक्षिण, वटवा, निकोल, नरोडा, ठककरबापानगर और बापूनगर। अहमदाबाद पूर्व क्षेत्र की कुल आबादी 24,43,198 है, जिसमे से 16 प्रतिशत लोग गांवों में और 83 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। यहां 8 प्रतिशत लोग एससी और 1 प्रतिशत एसटी वर्ग के लोग हैं। 15वीं लोकसभा के लिए यहां पहली बार साल 2009 में चुनाव हुए थे, जिसमें बीजेपी के हरेन पाठक ने यहां से जीत दर्ज की थी तो वहीं साल 2014 के चुनाव में भी यहां से भाजपा जीती और परेश रावल यहां से सांसद चुने गए।
परेश रावल का लोकसभा में प्रदर्शन
इलेक्शन के लिए सबमिट किए एफिडेविट के मुताबिक परेश रावल 80 करोड़ के मालिक हैं। उनकी पत्नी स्वरूप संपत रावल प्लेटाइम क्रिएशन नाम की कंपनी की ओनर हैं। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक परेश रावल की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 65 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 8 डिबेट में हिस्सा लिया है और 185 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 16,01,832 थी, जिसमें से मात्र 9,85,525 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,60,074 और महिलाओं की संख्या 4,25,451 थी।
अहमदाबाद पूर्व,एक परिचय-प्रमुख बातें-
अहमदाबाद गुजरात प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है जो कि साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है। 1970 में गांधीनगर में राजधानी स्थानांतरित होने से पहले अहमदाबाद ही गुजरात की राजधानी थी, अहमदाबाद का नाम सुल्तान अहमद शाह के नाम पर रखा गया है। सुल्तान अहमद शाह ने इस शहर की स्थापना 1411 ईसवीं में की थी, वैसे अहमदाबाद का प्राचिन नाम कर्णावती था। इस शहर को भारत का मेनचेस्टर भी कहते है। वर्तमान समय में, अहमदाबाद को भारत के गुजरात प्रांत के एक प्रमुख औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। साबरमती आश्रम की वजह से यह शहर पूरे देश में अलग पहचान रखता है।
1990 से अहमदाबाद क्षेत्र को बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन गुजरात विधानसभा चुनावों में यहां की 2 सीटों पर कांग्रेस के दो अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने बीजेपी उम्मीदवारों को हरा दिया था, जिसकी वजह से इस वक्त कांग्रेस आत्मविश्वास से भरी हुई है और उसे लगता है कि इन विधानसभा चुनावों का असर लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा और इसी वजह से वो पूरे दम से इस बार यहां के रण में उतरने को तैयार है। तो वहीं भाजपा के ऊपर अपनी जीत को बरकरार रखने का दवाब है, फिलहाल सियासी जंग में जीत उसी की होगी जिसे जनता का आशीर्वाद मिलेगा और उसका आशीष किसके साथ है, इस बात को जानने के लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना होगा।












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