पी चिदंबरम के पास CBI की गोपनीय रिपोर्ट पहुंचने की जांच शुरू
नई दिल्ली: देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पास सीबीआई की गोपनीय रिपोर्ट कैसे पहुची। इसकी जांच एजेंसियों ने पड़ताल शुरु कर दी है। उन्हें इसके मिलने की प्रक्रिया के बारे में जांच एजेंसियों ने दोबारा पड़ताल शुरू कर दी है। दरअसल वित्त मंत्रालय ने उनके दावों को खारिज कर दिया था कि उन्होंने ये संसदीय सवालों के जवाब देने के लिए थे। पूर्व वित्त मंत्री को तब तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब सीबीआई को उनके घर में छापेमारे के दौरान टू-जी से संबंधित सीबीआई की गोपनीय फाइलें मिली थीं।

पी चिदंबरम ने अपनी सफाई में कहा कि जब वो वित्त मंत्री थे, तब उन्हें संसद में जवाब देने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) द्वारा उनके कार्यालय को आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। एजेंसियों का दावा है कि ये दस्तावेज एयरसेल-मैक्सिस जांच की स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा थे, जिन्हें सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक सीलबंद कवर में दायर किया था। गौरतलब है कि चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती एयरसेल-मैक्सिस मामले में आरोपी हैं और प्रवर्तन निदेशालय ने इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
हालांकि कोर्ट ने ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान नहीं लिया है। ये स्टेटस रिपोर्ट 21 फरवरी, 2013 से 7 जुलाई, 2013 तक की गई जांच से संबंधित है। चिदंबरम से ये बताने के लिए कहा गया था कि आखिर सीबीआई के वित्त मंत्रालय के दायरे में नहीं आने के बावजूद भी उन्हें दस्तावेज किसने मुहैया कराए। उन्होंने चिदंबरम को ईडी का 20 अगस्त को डीइए का लिखा लेटर दिखाते हुए कहा था इसमें पूर्व वित्त मंत्री को गोपनीय सीबीआई दस्तावेजों को प्रेषित करने का कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया है।
इसके जवाब में चिदंबरम ने माना कि वह याद नहीं कर पा रहे थे कि अधिकारियों ने उनके कार्यालय को कौन से दस्तावेज दिए। उनकी दलील थी कि उन्हें संसद में बहस के सिलसिले में दस्तावेज दिए गए थे। उन्होंने कहा कि संसद में साल 2012, 2013 और 2014 में एक से अधिक अवसरों पर एयरसेल-मैक्सिस से संबंधित मुद्दा उठाया गया था। सीबाआई ने ईडी की आधिकारिक प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि 13 जुलाई, 2018 को उसने डीईए के साथ 2 जी मामले की प्रगति रिपोर्ट की प्रति साझा करने से इनकार कर दिया था।












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