यूरोपीय यूनियन सांसदों की कश्मीर दौरे पर बोलीं प्रियंका, ये इस सरकार का अनोखा राष्ट्रवाद
EU सांसदों के कश्मीर दौरे पर बोलीं प्रियंका, बड़ा अनोखा राष्ट्रवाद है
नई दिल्ली। यूरोपीय यूनियन के 28 सांसदों का एक दल मंगलवार को श्रीनगर पहुंचा है। इस प्रतिनिधिमंडल में इटली, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और पोलैंड के एमपी हैं। जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद 5 अगस्त के जो तनाव के हालात हैं, उसी को लेकर जायजा लेने ये दल पहुंचा है। यूरोपीय यूनियन के सांसदों को कश्मीर में दौरा करने की इजाजत देने के सरकार के फैसले पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठा हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे सरकार का अनोखा राष्ट्रवाद कहा है तो भाजपा के ही एमपी सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सरकार की आलोचना की है।
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प्रियंका, राहुल के ट्वीट
प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है, कश्मीर में यूरोपियन सांसदों को सैर-सपाटा और हस्तक्षेप की इजाजत लेकिन भारतीय सांसदों और नेताओं को पहुँचते ही हवाई अड्डे से वापस भेजा गया! बड़ा अनोखा राष्ट्रवाद है यह।
यूरोपीय सांसदों के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, यूरोप से आए सांसदों का जम्मू-कश्मीर का दौरा करने के लिए स्वागत है जबकि भारतीय सांसदों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है। कुछ न कुछ ऐसा है जो बहुत गलत है।

येचुरी, मायावती ने उठाए सवाल
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस पर ट्वीट किया, जम्मू-कश्मीर में संविधान की धारा 370 को खत्म करने के बाद वहां के हालात का जायजा लेने के लिए यूरोपीय संघ के सांसदों को कश्मीर भेजने से पहले भारत सरकार यदि देश की विपक्षी पार्टियों के सांसदों को वहां जाने देती तो यह ज्यादा बेहतर होता।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सरकार के कदम की आलोचना करते हुए ट्वीट किया, भारतीय राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों को श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर निकलने से रोका क्यों गया? मुझे श्रीनगर में तभी जाने दिया गया जब सुप्रीम कोर्ट ने मेरी याचिका पर मुझको वहां जाने की इजाजत दी। आज भी भारतीय सांसदों को जाने की इजाजत नहीं है जबकि प्रधानमंत्री मोदी ईयू सांसदों का स्वागत कर रहे हैं।
भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, अनैतिक
भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया, मुझे आश्चर्य है कि विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के सांसदों के लिए जम्मू-कश्मीर के कश्मीर क्षेत्र के दौरा की व्यवस्था की है। यह निजी यात्रा है ना कि आधिकारिक। यह हमारी राष्ट्रीय नीति के खिलाफ है। मैं सरकार से इस यात्रा को रद्द करने का आग्रह करता हूं क्योंकि यह अनैतिक है।
बता दें कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद वहां पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं।फोन और इंटरनेट कनेक्शन को बंद कर दिया गया था। ज्यादातर नेताओं भी या तो गिरफ्तार कर लिया गया या वो नजरबंद हैं। इसके बाद कई विपक्ष के नेता कश्मीर जाने चाहते थे लेकिन इन को श्रीनगर एयरपोर्ट से लौटा दिया गया। एक तरफ सरकार जहां कश्मीर में सब ठीक होने का दावा करती रही है तो वहीं कश्मीर के लोगों का कहना है कि यहां कुछ ठीक नहीं है।
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