प्राइवेट अस्पतालों की लूट: एक रुपये का ग्लव्स बेच रहे 2800 में, दवाओं पर कमा रहे 1700 फीसदी का मुनाफा

नई दिल्ली। निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों के साथ किस तरह से लूट की जा रही है इसको लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है वो बेहद चौंकाने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के कई निजी अस्पताल दवाओं समेत अन्य मेडिकल उपकरण के एमआरपी में भारी हेराफेरी करके 1700 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा कमा रहे हैं। रिपोर्ट में पता चला है कि ये निजी अस्पताल एक रुपये में खरीदे गए ग्लव्स को 2800 रुपये में बेच रहे हैं। इसी तरह से सीरिंज और दवाओं पर भी 1200 से 1700 फीसदी तक का मुनाफा वसूला गया।

एनपीपीए की स्टडी में खुलासा

एनपीपीए की स्टडी में खुलासा

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की स्टडी में इस बात का खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के कई निजी अस्पताल एमआरपी में हेराफेरी कर दवाओं, सीरिंज और दूसरे मेडिकल उपकरणों पर 1200 से 1700 फीसदी का मुनाफा कमा रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ये अस्पताल अपनी 'सेवाओं' के लिए भी मोटी रकम वसूलते हैं। एनपीपीए ने फोर्टिस समेत दिल्ली-एनसीआर के 4 बड़े और नामी अस्पतालों पर स्टडी करके ये रिपोर्ट तैयार की है। जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई है। साथ ही एनपीपीए ने यह रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर भी जारी की है।

1200 से 1700 फीसदी का मुनाफा कमा रहे निजी अस्पताल

1200 से 1700 फीसदी का मुनाफा कमा रहे निजी अस्पताल

एनपीपीए ने बताया कि हाल के दिनों चार मरीजों ने अलग-अलग अस्पतालों पर ज्यादा चार्ज करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद इन अस्पतालों के बिलों की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि एक अस्पताल ने ऑपरेशन के दौरान 1200 ग्लव्स खराब होने की बात कहते हुए एक मरीज से 11,400 रुपये वसूल लिए। मरीज के बिल में एक ग्लव्स की कीमत करीब 10 रुपये रखी गई, जबकि अस्पताल ने इस ग्लव्स को महज डेढ़ रुपये में खरीदा है।

4 बड़े और नामी अस्पतालों पर स्टडी

4 बड़े और नामी अस्पतालों पर स्टडी

ऐसे ही एक अस्पताल ने ब्लड चढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कैनुला को दो रुपये में खरीद कर मरीजों से करीब 1500 रुपये इसके लिए वसूला गया। जांच के नाम पर भी मरीजों से अच्छी-खासी कीमत वसूली गई, जैसे सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच शामिल है। दिल्ली में जहां एमआरआई के लिए सामान्य डायग्नोस्टिक सेंटर महज दो हजार रुपये वसूलते हैं वहीं एक अस्पताल प्रति एमआरआई मरीज से 10 हजार रुपये लिए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट

फिलहाल जहां एक ओर केंद्र सरकार 10 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा देने की योजना शुरू करने जा रही है वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों से की लूट की जा रही है चौंकाने वाला है। देखना होगा कि एनपीपीए की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इसको लेकर क्या कदम उठाती हैं।

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