प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ब्रुनेई, इंडोनेशिया के लिए रवाना

यात्रा पर रवाना होने से पहले दिए वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का आसियान के साथ संबंध हमारी 'लुक ईस्ट' नीति के लिए महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षो में यह मजबूत, व्यापक और बहुआयामी साझेदारी के रूप में उभरा है। दोनों पक्षों के पिछले साल अपने संबंधों को एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में बढ़ावा देने के बाद से यह ब्रुनेई में पहला शिखर सम्मेलन है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इससे मुझे व मेरे आसियान सहयोगियों को बीते कुछ महीनों में हमारे संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा और हमारे रिश्ते को और अधिक गति देने का एक अवसर मिलेगा।"
उन्होंने कहा कि पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता व समृद्धि को बढ़ावा देने वाला सबसे महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा, "भारत पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन को क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण की प्रेरणा के रूप में देखता है और वह आसियान व उसके एफटीए भागीदारों के बीच क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के लिए बातचीत में हिस्सा लेगा। इससे इस क्षेत्र में एक आर्थिक समुदाय गठित करने में सहयोग मिलेगा।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "यह शिखर सम्मेलन नालंदा विश्वविद्यालय को दोबारा शुरू करने की दिशा में बहुत सहयोगी होगा। इस विश्वविद्यालय में अगले साल से शैक्षिक सत्र शुरू होना है। पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन से इतर मुझे विश्व के अन्य नेताओं से मुलाकात का भी अवसर मिलेगा।"
उन्होंने कहा कि भारत के इंडोनेशिया के साथ संबंध व्यापक क्षेत्र के साथ भारत के एकीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "ब्रुनेई दारुस्सलाम व इंडोनेशिया की मेरी यात्रा हमारी विदेश नीति में महत्वपूर्ण पूर्व में हमारे कार्यों में और तेजी लाएगी। साथ ही एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि व स्थिरता में सहयोग देगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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