क्यों दलहन के भी बढ़ने लगे दाम, भारत की स्थिति देख मुनाफाखोरी में जुटे निर्यातक देश?
मंगलवार को ही एक रिपोर्ट आई कि भारत में गेहूं के दाम 6 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके पीछे त्योहारी मौसम में बढ़ती मांग और सप्लाई की कमी का हवाला दिया गया था। लेकिन, सिर्फ रोटी ही नहीं, अब दालें भी महंगी होने लगी हैं।
पिछले दो महीनों से लोग सब्जियों के बेतहाशा बढ़े दाम से परेशान हैं। खासकर टमाटर की कीमतें तो अमीरों को भी लाल कर रहा है। देश में बहुत बड़ी आबादी ऐसी है, जो सब्जियों की भरपाई के लिए दाल-रोटी से काम चला लेती है। लेकिन, अब ये दोनों चीजें भी महंगी होने लगी हैं।

दालों की थोक कीमतें 2 से 3% तक बढ़ीं-रिपोर्ट
भारत में दलहन की कीमतों में आई उछाल के कई कारण हैं। इसमें से एक यह भी है कि दलहन निर्यातक देशों ने भारत की मौजूदी स्थिति में मुनाफाखोरी के लिए जमाखोरी शुरू कर दी है। इसकी वजह से एक हफ्ते के अंदर दालों की थोक कीमतें 2 से 3% तक बढ़ गई हैं।
खरीफ मौसम के दलहन की बुवाई पिछड़ी
मसूर और मूंग की कीमतों में उछाल की वजह ये भी बताई जा रही है कि सब्जियों के बढ़े हुए दाम की वजह से इनकी मांग में काफी इजाफा हुआ है। ऊपर से इसबार मौसम की अजीब मार के चलते दाल की खरीफ फसलों की बुवाई भी लगभग 9% पिछड़ रही है। भारत की इन स्थितियों पर दाल निर्यातक देशों, जैसे कि कनाडा, म्यांमार और मोजांबिक गहरी नजर लगाए हुए हैं।
उड़द की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी
पिछले दिनों में जिन दालों की कीमतों में सबसे अधिक उछाल दर्ज किया गया है, उसमें उड़द शामिल है। महाराष्ट्र का जलगांव देश का सबसे बड़ा उड़द प्रोसेसिंग केंद्र है। यहां पिछले हफ्ते उड़द के दाम लगभग 3 रुपए किलो या करीब 3% बढ़ गए हैं।
विदेश से आने वाली अरहर दाल काफी महंगी हो गई
इस तरह अलग-अलग क्वालिटी वाले तुअर या अरहर दाल की कीमतों में भी पिछले हफ्ते 200 से 400 रुपए क्विंटल की बढ़ोतरी हो चुकी है। महाराष्ट्र के अकोला और कर्नाटक के गुलबर्गा में पिछले हफ्ते तुअर दाल के दाम 136 रुपए किलो से लेकर 140 रुपए किलो तक बढ़ गए। जबकि, मुंबई में मोजांबिक से जो तुअर दाल मंगवाई जाती है, वह हफ्ते भर में 5.5 रुपए प्रति किलो बढ़ गई हैं।
आयात में भी आई है गिरावट
देश भर के व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक उड़द की बुवाई में 14% की कमी दर्ज हुई है, जबकि अरहर की खेती में 8% की गिरावट देखी गई है। अरहर दाल की कीमतों में उछाल की वजह देश में स्टॉक की कमी, खरीफ के मौसम में बुवाई में देरी (मानसून की असमानता के चलते) और आयात में गिरावट बताई जा रही है।
निर्यातक देशों ने मुफाखोरी के लिए जमाखोरी शुरू की
वहीं, उड़द की कीमतें स्टॉक की कमी और कम बुवाई के चलते तो बढ़ी ही हैं, म्यामांर से सप्लाई में भी कमी आई है, क्योंकि वहां के निर्यातक भारत की स्थिति पर नजदीकी नजर रखे हुए हैं और उन्होंने मुफाखोरी के लिए जमाखोरी शुरू कर दी है।
फिलहाल, कम से कम अरहर और उड़द की कीमतों में गिरावट आने की कोई संभावना नहीं नजर आ रही है। उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत यही होगी कि कीमतों में जो उछाल आने लगी हैं, वह थोड़ी स्थितरता पकड़ लें। तब तक सब्जियों के दाम भी कम होने के आसार बनेंगे। लेकिन, जबतक हालात में सुधार नहीं होते, सामान्य जनता के लिए तो दाल-रोटी पर भी आफत बनी रह सकती है।
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