President Vs Mamata Banerjee: राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी कूदे, केंद्र पर लगाए आरोप
President Vs Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में अगले महीने चुनाव प्रस्तावित हैं और इस माहौल में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। राष्ट्रपति के अपमान के मुद्दे पर जमकर सियासी बयानबाजी चल रही है। दक्षिण 24 परगना जिले के मथुरापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने मणिपुर हिंसा, राष्ट्रपति की भूमिका और देश की विदेश नीति जैसे मुद्दों को उठाया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब मणिपुर तीन साल तक हिंसा की आग में जल रहा था, तब राष्ट्रपति की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर उद्घाटन और नए संसद भवन के उद्घाटन जैसे बड़े कार्यक्रमों में राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया गया। यह साफ दिखाता है कि बीजेपी संवैधानिक पदों की गरिमा का कितना ख्याल रखती है।

President Vs Mamata Banerjee: बीजेपी पर लगाया राष्ट्रपति के अपमान का आरोप
टीएमसी नेता ने राष्ट्रपति के अपमान के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति है। अगर युद्ध जैसे हालात होते हैं, तो आदेश उनके माध्यम से जाने चाहिए। उन्होंने अमेरिका के साथ ट्रेड डील और रूस से तेल खरीद पर मिली छूट पर निशाना साधा। टीएमसी सांसद ने कहा कि मौजूदा हालात में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जो चिंता का विषय है।
Abhishek Banerjee ने मोदी सरकार पर बोला तीखा हमला
अभिषेक बनर्जी संसद और सड़क दोनों ही जगहों पर बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हैं। उन्होंने मोदी सरकार पर तीखा वार करते हुए कहा, 'देश के संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार को इस दिशा में जवाबदेह होना चाहिए।' बता दें कि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए सीएम ममता बनर्जी नहीं पहुंची थीं। विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि धरने पर होने की वजह से उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।
अब टीएमसी ने बीजेपी के राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोपों पर पलटवार किया है। ममता बनर्जी के बाद उनके भतीजे अभिषेक ने भी केंद्र को निशाने पर लिया है। टीएमसी सुप्रीमो पहले ही आरोप लगा चुकी हैं कि बीजेपी राजनीतिक हितों के लिए राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद का भी इस्तेमाल करती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ सकती है।












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