President Election : यशवंत सिन्हा नामांकन से पहले अपनों में ही घिरे, CPM सांसद बोले- बेस्ट कैंडिडेट नहीं

राष्ट्रपति चुनाव (President Election) पर सबकी नजरें हैं। विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा नामांकन दाखिल करेंगे। हालांकि, विपक्ष में शामिल सीपीएम सांसद का कहना है कि यशवंत सिन्हा बेस्ट कैंडिडेट नहीं हैं। पढ़िए खबर

कोलकाता, 25 जून : राष्ट्रपति चुनाव (President Election) में यशवंत सिन्हा बेस्ट कैंडिडेट नहीं (yashwant sinha not best candidate) हैं। सीपीएम सांसद बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM Bikash Ranjan Bhattacharya) ने ये बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि विपक्षी एकता बनाए रखने के कारण सीपीएम को यशवंत सिन्हा का समर्थन करना पड़ेगा। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भट्टाचार्य ने कहा, वे कैंडिट सेलेक्शन से खुश नहीं हैं।

yashwant sinha

यशवंत सिन्हा से बेहतर उम्मीदवार !

राज्य सभा सांसद बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM Bikash Ranjan Bhattacharya) ने कहा कि यशवंत सिन्हा के बदले किसी ऐसे उम्मीदवार को चुना जाना चाहिए था, जो विपक्षी दलों में अधिक स्वीकार्य होता। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास संख्याबल नहीं है, ऐसे में सीपीएम विपक्षी दलों में बिखराव का कारण नहीं बनेगी, लेकिन राष्ट्रपति पद के लिए यशवंत सिन्हा से बेहतर उम्मीदवार का चुनाव बेहतर विकल्प होता। बता दें कि सांसद बिकास त्रिपुरा के पूर्व एडवोकेट जनरल रहने के अलावा कोलकाता के मेयर भी रह चुके हैं।

President Election में लड़ना गलत नहीं

भट्टाचार्य ने कहा कि "यह देखते हुए कि वामपंथियों की ताकत कम है, हमें अन्य दलों की राय से सहमत होना होगा।" उन्होंने कहा कि वाम दल समेत पूरी अपोजिशन को एकजुट होकर लड़ना होगा, लेकिन यशवंत सिन्हा से "बेहतर" उम्मीदवार का चयन अच्छा होता। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला गलत है, वे ऐसा नहीं कह रहे हैं। बता दें कि भट्टाचार्य सीपीएम की ओर से पश्चिम बंगाल के एकमात्र सांसद हैं।

यशवंत सिन्हा President Election से पहले बोले, भारत मुश्किल...

इससे पहले यशवंत सिन्हा ने विपक्षी पार्टियों को लिखे पत्र में कहा, वर्तमान दौर में भारत बहुत ही मुश्किल दौर में है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को संबोधित पत्र में भाजपा का नाम लिए बिना हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत के बाद वे संविधान के मूल्यों प्रति निष्ठा रखेंगे और लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हथियार नहीं बनने देंगे, जैसा इस समय हो रहा है। बता दें कि सिन्हा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। मार्च 2021 में यशवंत सिन्हा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हुए। हालांकि कुछ दिन पहले राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्होंने टीएमसी छोड़ दी। सिन्हा पीएम नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार की मुखर आलोचना करने के लिए सुर्खियों में रहे हैं।

द्रौपदी मुर्मू के नामांकन में 'शक्ति प्रदर्शन' !

गौरतलब है कि यशवंत सिन्हा का मुकाबला द्रौपदी मुर्मू से है। एनडीए कैंडिडेट द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। ओडिशा की निवासी द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पूर्व राज्यपाल रह चुकीं हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल (BJD) की ओर से द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया है।

द्रौपदी मुर्मू की आसान जीत का अनुमान !

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (BSP) द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी। कई अन्य दलों ने भी द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलन किया है। आदिवासी समाज से आने वाली द्रौपदी मुर्मू राज्यपाल जैसे ओहदे तक पहुंच चुकी हैं। अब देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं। सत्तारुढ़ पार्टी का संख्याबल, राष्ट्रपति चुनाव का गणित, मीडिया रिपोर्ट और राजनीतिक समीक्षकों ने द्रौपदी मुर्मू की आसान जीत का अनुमान लगाया है। ॉ

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