क्या जनसुराज को खत्म कर कांग्रेस में एंट्री लेंगे प्रशांत किशोर? प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद चौतरफा चर्चा
Prashant kishor News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। वजह बनी है उनकी हालिया मुलाकात कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से।
इस मुलाकात के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में सवाल गूंजने लगे हैं कि क्या प्रशांत किशोर अपनी जनसुराज पार्टी को पीछे छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने की तैयारी में हैं।

बिहार चुनाव के बाद क्यों अहम मानी जा रही है यह मुलाकात
प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी की यह मुलाकात बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने के करीब एक महीने बाद हुई। यही कारण है कि इसे सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार मानने से इनकार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक यह बातचीत 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर हुई। हालांकि जनसुराज या कांग्रेस की ओर से इस मुलाकात पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन चुप्पी ने अटकलों को और हवा दे दी है।
जनसुराज का खराब प्रदर्शन, किशोर की रणनीति पर सवाल
यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब बिहार चुनाव में जनसुराज पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। 238 उम्मीदवारों में से 236 की जमानत जब्त हो गई। इस नतीजे के बाद प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस की हालत भी बहुत बेहतर नहीं रही। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस महज छह सीटों पर सिमट गई, जबकि 2020 में उसे 19 सीटें मिली थीं। दोनों ही पक्ष इस वक्त राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।
क्या यह सिर्फ बातचीत थी या बड़ी सियासी तैयारी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सामान्य बातचीत से कहीं आगे की हो सकती है। कांग्रेस लंबे समय से संगठन में नई ऊर्जा और ठोस चुनावी रणनीति की तलाश में है। वहीं प्रशांत किशोर को एक मजबूत राष्ट्रीय मंच की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में यह बैठक संभावनाओं को टटोलने की कोशिश भी मानी जा रही है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किशोर सीधे कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं।
गांधी परिवार और प्रशांत किशोर का पुराना रिश्ता
प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के रिश्ते नए नहीं हैं। रणनीतिकार के तौर पर उनका कांग्रेस नेतृत्व से संवाद पहले भी रहा है। 2020 के बिहार चुनाव के दौरान किशोर ने कांग्रेस के कई मुद्दों की सार्वजनिक आलोचना की थी। उन्होंने मतदाता सूची संशोधन और राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान को बिहार में अप्रासंगिक बताया था। बावजूद इसके, उनका खुद का राजनीतिक प्रयोग भी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका।
2022 की बातचीत और टूटा भरोसा
2021 में जेडीयू से निष्कासन के बाद प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का रोडमैप पेश किया था। अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के आवास पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी अहम बैठक हुई।
किशोर ने संगठन सुधार और चुनावी रणनीति को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। बाद में कांग्रेस ने 'एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप 2024' बनाया और किशोर को इसमें शामिल होने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। अधिकार और स्वतंत्रता को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी और बातचीत टूट गई।
अब आगे क्या संकेत दे रही है ताजा मुलाकात
बिहार चुनाव के बाद प्रियंका गांधी से हुई यह नई मुलाकात पुराने जख्मों को फिर से खोलती नजर आ रही है। सवाल यही है कि क्या इस बार कांग्रेस और प्रशांत किशोर पिछली असहमति से आगे बढ़ पाएंगे।
क्या कांग्रेस उन्हें कोई बड़ी भूमिका देने को तैयार होगी या यह बातचीत महज विचार-विमर्श तक सीमित रहेगी। फिलहाल इतना तय है कि इस मुलाकात ने आने वाले दिनों में कांग्रेस की राजनीति और प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।












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