Caste Census: जाति जनगणना पर विपक्ष एकजुट, NDA में मतभेद, क्या मोदी सरकार संकट में?
जाति जनगणना का मुद्दा भारत में तेजी से जोर पकड़ रहा है, और यह सियासी गलियारों में गर्म बहस का कारण बन गया है। विपक्षी दल पूरी ताकत से इसे लेकर मोदी सरकार पर दबाव बना रहे हैं। राहुल गांधी ने खुले तौर पर घोषणा की है कि देशभर में जाति जनगणना होगी। इसके लिए उन्हें अपने सहयोगी दलों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।
वहीं, सत्तारूढ़ एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में इस मुद्दे पर मतभेद उभर रहे हैं। एनडीए के कम से कम तीन सहयोगी दल जाति जनगणना के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं।

मोदी सरकार पर बढ़ता दबाव
मोदी सरकार पर राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष के साथ-साथ एनडीए के कुछ सहयोगी दल भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, जिससे सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने जातीय जनगणना की मांग का समर्थन किया है। इसी तरह, बिहार के सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी यही रुख अपनाया है।
सूत्रों के अनुसार, अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) कल्याण पर बनी संसदीय समिति की पहली बैठक में विपक्ष ने एकजुट होकर जाति जनगणना की मांग की, जिसे जेडीयू ने भी समर्थन दिया। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाकर उनसे ओबीसी के बारे में अधिक जानकारी जुटाने की बात कही गई। गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले देश के रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर जनगणना करवाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए उनकी उपस्थिति भी अनिवार्य थी।
एनडीए में मतभेद और विपक्ष की एकजुटता
जेडीयू, जो कि एनडीए का हिस्सा है, जातीय जनगणना का मुखर समर्थक रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में जाति जनगणना करवाकर उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की थी। संसदीय समिति की बैठक में जाति जनगणना के मुद्दे पर चर्चा के दौरान जेडीयू के सांसद ने भी समर्थन किया। बीजेपी के कुछ सांसद इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे, जिससे यह साफ हो गया कि एनडीए में इस मुद्दे पर मतभेद हैं।
विपक्ष की रणनीति
राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' जातीय जनगणना को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि यह मुद्दा उन्हें आगामी लोकसभा चुनावों में फायदा पहुंचा सकता है। बीजेपी के अंदर भी एक वर्ग में यह भावना है कि अगर सरकार ने जाति जनगणना की मांग को नजरअंदाज किया, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
क्या मोदी सरकार फंसने वाली है?
जातीय जनगणना के मुद्दे पर एनडीए में मतभेद और विपक्ष की एकजुटता ने मोदी सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार पर विपक्ष के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों का भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है। हालांकि, मोदी सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह इस मुद्दे पर अपने रुख को स्पष्ट करे, नहीं तो राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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