कभी दूध बेचकर घर चलाने वाली ममता आज दूसरी बार बनेंगी सीएम
नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। ममता बनर्जी एक बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रही है। ममता के सत्ता तक पहुंचने का संघर्ष आसान नहीं रहा है। कई मुश्किलों और कठिन हालातों से गुजरकर ममता ने खुद को पश्चिम बंगाल की जनता के दिल में बिठाया है। दोबारा जीत हासिल कर आज भले ही ममता सत्ता के शिखर पर हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने सालों तक कड़ी मेहनत की है। ममता बनर्जी के दोबारा सीएम बनने के 10 बड़े कारण
शून्य से शिखर तक पहुंचने के लिए ममता को अपने जीवन ने कई तकलीफों से गुजरना पड़ा। एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपना घर चलाने के लिए दूध बेचना पड़ा था। गरीबी में जी रही ममता को अपने छोटे भाई-बहन और विधवा मां के पालन-पोषण के लिए दूध बेचकर रोटी कमानी पड़ी। आइए ममता के संघर्ष भरे जीवन पर एक नजर डालें...

ममता का राजनीतिक सफर
ममता का जन्म 5 जनवरी 1955 को हुआ था। ममता के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और ममता जब बहुत छोटी थीं तभी उनकी मृत्यु हो गई थी।

छात्र जीवन से ही राजनीति में
ममता ने कानून और शिक्षा के अलावा के अलावा कला में भी डिग्री हासिल की है। उन्हें राजनीति में लाने वाले सुब्रत मुखर्जी थे। उन्होंने कांग्रेस की छात्र इकाई के तौर पर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।

ममता का राजनीतिक करियर
2006 के विधानसभा चुनावों में ममता को 294 में से केवल 30 सीटें ही मिली थीं। ममता ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना ली।

राजनीति में ममता
ममता चर्चा में उस वक्त आई जब उन्होंने 1984 में लोकसभा चुनाव में माकपा नेता सोमनाथ चटर्जी को पराजित किया। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री
1991 में वो पहली बार केंद्र में मंत्री बनीं। उन्होंने 1998 से 2001 तक ममता ने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया और फिर 2001 में एक बार फिर से वो कांग्रेस के साथ खड़ी आ गई। फिर उन्होंने 2001-06 तक बीजेपी का साथ दिया। 2011 में साम्यवादी सरकार को हराकर पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य मंत्री बनीं।

ममता की सादगी
ममता अपनी सादगी को लेकर हमेशा से चर्चा में रहीं। केंद्रीय मंत्री बनने के बावजूद ममता अपने कोलकाता के कालीघाट मंदिर के नजदीक स्थित एक मंजिला घर में रहती थी। वो सादी सूती साड़ी और रबड़ की चप्पलों में नजर आती है।

पूजा-पाठ में लगता है मन
ममता को राजनीतिक के अलावा लिखने और पेटिंग का शौक हैं। वो खाना बनाने का शौक रखती हैं। ममता धार्मिक प्रवृत्ति की है। दुर्गापूजा और काली पूजा में वो हमेशा शामिल होती है।

ममता का सफर
ममता की छवि ग़रीबों की मसीहा. दयालु या तीखे तेवर वाली एक महिला नेता के तौर पर है।
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