मणिपुर में राहुल गांधी के काफिले को पुलिस ने रोका, हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर जा रहे थे कांग्रेस नेता
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को हिंसा प्रभावित मणिपुर के लिए अपनी दो दिवसीय यात्रा की शुरूआत की लेकिन मणिपुर पहुंचते ही उनके काफिले को सुरक्षा कारणों से पुलिस ने रोक दिया गया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को तब रोका गया जब वो राजधानी इंफाल से चुराचांदपुर अपने काफिले के साथ जा रहे थे। रास्ते में उनके काफिले को मणिपुर पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रोक दिया।
पुलिस ने कहा- हमें डर था कि कहीं...
हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर जाने से राहुल गांधी को इसलिए रोका गया क्योंकि पुलिस को डर था कि उनके काफिले को हमलावरों का एक समूह समझ सकते हैं और जिससे कांग्रेस नेता को खतरा हो सकता है।
विष्णुपुर से पहले रोका गया काफिला
राहुल गांधी का काफिला उस समय रोका गया जब उनका काफिला इम्फाल से करीब 20 किलोमीटर दूर बिष्णुपुर में रोका गया।
हिंसा प्रभावित चूराचंदापुर में लोगों से मिलने जा रहे थे राहुल गांधी
खबरों के अनुसार राहुल गांधी हिंसा प्रभावित चूराचांदपुर हिंसा प्रभावित लोगों का हाल-चाल जानने के लिए जा रहे थे। याद रहे चूराचंदापुर वो ही जगह है जहां पिछले कई हफ्तों से जातीय हिंसा हो रही है। इस जातीय हिंसा ने सभी को हिलाकर रख दिया है।
काफिले को 'हमलावरों' का काफिला समझा जा सकता था
राहुल गांधी के काफिला रोके जाने पर बिष्णुपुर के पुलिस अधीक्षक बताया कि काफिले को गलती से चुराचंदापुर में 'हमलावरों' का काफिला समझा जा सकता है। एसपी ने कहा राहुल गांधी को यहां से आगे जाने की परमीशन नहीं दी जा सकती क्योंकि हम राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि आगजनी हुई थी और स्थिति कल रात भी बदतर थी।
कांग्रेसियों ने किया बवाल तो पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
खबरों के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हवाई मार्ग से जाने की सलाह दी गई थी लेकिन उन्होंने हेलिकॉप्टर से जाने के बजाय सड़क मार्ग से अपने काफिले के साथ जाने का निर्णय किया था। वहीं जब राहुल गांधी और उनके काफिले को पुलिस ने रोका तो कांग्रेस समर्थकों ने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाते शुरू कर दिए। जिन पर काबू पाने के लिए पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले भी दागे।
जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों से मिलने जा रहे थे राहुल गांधी
बता दें राहुल गांधी 29 और 30 जून के इंफाल और चूराचांदपुर का दौरा करने पहुंचे थे और वो हिंसा से प्रभावित लोगो कि लिए बने राहत शिविरों में दौरा करने वले थे। याद रहे मणिपुर में जातीय संघर्ष में अब तक 300 से अधिक राहत शिविरों में रह रहे हैं।












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