सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए होता है सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल: प्रधानमंत्री
नयी दिल्ली। मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद दंगों को लेकर सियासी दांव-पेंच के बाद राजनीतिक दलों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। दंगे के बाद आई स्टिंग ऑपरेशन ने राजनीतिक दलों की सच्चाई लोगों को सामने ला दी है कि किस तरह राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के लिेए हिंसा का इस्तेमाल करती है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि हिंसा में शामिल लोगों को कठोर दंड देकर ही उस्हें सीख दी जा सकती है। पीएम ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों को दंडित किया जाएगा। राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक के उद्घाटन मौके पर पीएम ने राज्य सरकारों से सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की । पीएम ने कहा कि सरकार को हिंसा फैलने वाले और हिंसा फैलाकर अपना स्वार्थ की सिद्धी करने वालो के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, फिर चाहे वे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों। अगर किसी भी पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस तरह की घटनाओं में संलिप्त पाया जाता है तो उसे दंडित किया जाएगा।

जहां पीएम ने हिंसा भड़काने के लिए राजनीतिक दलों को दोषी ठहराया तो वहीं उन्होंने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। उदाहरण गिनवाते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने में इसका इस्तेमाल तो वहीं मुजफ्फरनगर में हिंसा फैलने की वजह भी वो आपत्तिजनक विडियो ही थी। पीएम ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि हमें सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने का रास्ता तलाशना होगा।
मुजफ्फनगर हिंसा की चर्चा करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि हाल के सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कुछ ऐसी नकली वीडियो का सर्रकुलेशन सामने आया है जिससे सौहार्द बिगड़ा। मनमहोन सिंह ने अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया ज्ञान अर्जित करने का जरिया है, सोशल मीडिया से युवाओं को जानकारी मिलती है। ऐसे में उसके गलत इस्तेमाल से शांति और सौहार्द बिगड़ती है। लोगों को चाहिए कि इसके गलत इस्तेमाल को राका जाए।












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